जिला दवा विक्रेता संघ ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
महासमुंद। आनलाईन फार्मेसी कंपनियों द्वारा नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे अनियंत्रित कारोबार के खिलाफ आज जिले की थोक एवं चिल्हर दवा बाजार बंद रहा। इस आंदोलन को समर्थन देते हुए जिला दवा विक्रेता संघ महासमुंद ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव अरशी ने बताया कि आॅनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर पारंपरिक दवा व्यापार को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आॅनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना उचित सत्यापन के नकली, प्रतिबंधित और संवेदनशील दवाओं की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।उन्होने कहा कि दवाओं को केवल डॉक्टर के लिखित पर्चे पर ही दिए जाने का कानूनी प्रावधान है, वे भी आनलाइन माध्यमों से आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे युवाओं में नशे और दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। यह केवल व्यापार बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा का आंदोलन है। इसी मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदेशव्यापी बंद का निर्णय लिया गया है। श्री अनवर ने बताया कि प्रशासन से आॅनलाइन फामेर्सी कंपनियों पर सख्त नियंत्रण और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। इस संबंध में हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान जिला दवा विक्रेता संघ महासमुंद के जिला सचिव अरशी अनवर, ब्लॉक अध्यक्ष संजय जैन, मनोज मालू व शैलू अग्रवाल मौजूद थे। संघ ने बताया कि बंद के दौरान शहर सहित जिले के सभी स्वतंत्र थोक एवं रिटेल मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने प्रशासन अलर्ट इधर, संघ की अपील का असर आज जिलेभर में दिखा। इस दौरान जिले की लगभग 560 मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। हालांकि राष्ट्रव्यापी केमिस्ट हड़ताल को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए आवश्यक दवाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश थे। जिसके अनुसार जिले में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों, धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स, शासकीय अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और अन्य औषधि वितरण केंद्रों में जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने कहा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



