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मासिक काव्य संध्या ने अपनी 50वीं स्वर्णिम यात्रा पूरी की, शब्द जब संवेदना से जुड़ते हैं, भाव जब अभिव्यक्ति का रूप लेते हैं और विचार जब साहित्य की सुगंध बिखेरते हैं, तब एक ऐसी सांस्कृतिक संध्या का सृजन होता है

Sahity srijan ki swarnim yatra: साहित्य सृजन की स्वर्णिम यात्रा – शब्द कभी मौन नहीं होते-वे विचार बनकर जन्म लेते हैं…

Sahity srijan ki swarnim yatra: साहित्य सृजन की स्वर्णिम 50वीं काव्य संध्या – शब्दों की साधना, संवेदनाओं का उत्सव और साहित्य का सम्मान

Sahity srijan ki swarnim yatra: 50 कवियों ने किया काव्य पाठ,साहित्यकारों के साथ श्रेष्ठ रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों का भी हुआ सम्मान

Sahity srijan ki swarnim yatra: रायपुर। शब्द जब संवेदना से जुड़ते हैं, भाव जब अभिव्यक्ति का रूप लेते हैं और विचार जब साहित्य की सुगंध बिखेरते हैं, तब एक ऐसी सांस्कृतिक संध्या का सृजन होता है, जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की चेतना को जागृत करने का माध्यम बन जाती है। कुछ ऐसा ही साहित्यिक, भावनात्मक और गरिमामय वातावरण रविवार काे राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में देखने को मिला, जहां साहित्य सृजन संस्थान की निरंतर आयोजित होने वाली मासिक काव्य संध्या ने अपनी 50वीं स्वर्णिम यात्रा पूरी की। शब्द,सृजन, संवेदना और संस्कार के मूल भाव को आत्मसात करते हुए आयोजित इस गोल्डन जुबली काव्य संध्या में 50 कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, समाज,जीवन, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन विचारों को अभिव्यक्ति दी.कविता के विविध रंगों,भावों की गहराई और शब्दों की शक्ति ने इस आयोजन को साहित्यिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

Sahity srijan ki swarnim yatra: कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं,संवेदनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है

काव्य संध्या का वास्तविक अर्थ केवल कविताओं का पाठ करना नहीं,बल्कि भावनाओं, अनुभूतियों, विचारों और जीवन के अनुभवों को शब्दों के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाना है. कविता वह सशक्त माध्यम है जो कभी समाज को आईना दिखाती है,कभी मनुष्य के अंतर्मन को स्पर्श करती है और कभी समय की विसंगतियों के विरुद्ध चेतना का स्वर बनकर उभरती है। साहित्य सृजन संस्थान की 50वीं काव्य संध्या इसी साहित्यिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई.निरंतरता, रचनात्मकता और साहित्य के प्रति समर्पण से सजी इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि साहित्य की सार्थकता केवल लिखने और पढ़ने में नहीं, बल्कि विचारों को जीवंत बनाए रखने और समाज में संवेदना का विस्तार करने में निहित है।

Sahity srijan ki swarnim yatra: डॉ. संजय अलंग की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. संजय अलंग उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में भिलाई की वरिष्ठ राष्ट्रीय कवयित्री संतोष झांझी तथा कोरबा की लोकप्रिय कवयित्री फिरोजा खान ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई.कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर अजीत शर्मा ने की। साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पित इस आयोजन में कवियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ साहित्यिक संवाद और सृजनशीलता को प्रोत्साहित करने की भावना प्रमुख रही।

Sahity srijan ki swarnim yatra: 50 कवि,50 अभिव्यक्तियां और साहित्य के नाम एक स्वर्णिम अध्याय

50वीं काव्य संध्या का विशेष आकर्षण 50 कवियों का काव्य पाठ रहा. प्रत्येक रचना अपने भीतर एक अलग भावभूमि, एक अलग दृष्टिकोण और जीवन को देखने का विशिष्ट नजरिया समेटे रही. कविता के माध्यम से कहीं संवेदनाओं की कोमलता दिखाई दी, तो कहीं विचारों की प्रखरता और सामाजिक सरोकारों की गूंज सुनाई दी। यह आयोजन उन सभी रचनाकारों के लिए एक साझा मंच बना, जहां शब्दों को सम्मान, भावनाओं को अभिव्यक्ति और साहित्यिक प्रतिभा को पहचान मिली. संस्थान की यह उपलब्धि उसकी निरंतर सक्रियता और साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक बनी।

Sahity srijan ki swarnim yatra:साहित्यकारों के साथ पत्रकारिता का भी हुआ सम्मान

इस स्वर्णिम अवसर पर साहित्यिक योगदान के साथ पत्रकारिता की भूमिका को भी सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में मीडिया रिपोर्टरों एवं पत्रकारों को श्रेष्ठ रिपोर्टिंग सम्मान – 2026’ से सम्मानित किया गया.वहीं,कवियों को उनकी काव्यात्मक अभिव्यक्ति के लिए श्रेष्ठ काव्य पाठ सम्मान प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। यह सम्मान समारोह इस विचार को रेखांकित करता है कि साहित्य और पत्रकारिता दोनों ही समाज की चेतना को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण माध्यम हैं.साहित्यकार अपनी कलम से संवेदनाओं और विचारों को स्वर देते हैं, जबकि पत्रकार समाज की घटनाओं, समस्याओं और उपलब्धियों को जनमानस तक पहुंचाते हैं.दोनों की सार्थक भूमिका एक जागरूक, संवेदनशील और विचारशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण है।

Sahity srijan ki swarnim yatra: निरंतरता से उपलब्धि तक का सफर

किसी साहित्यिक आयोजन का 50वें पड़ाव तक पहुंचना केवल एक संख्या की उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर साधना,सामूहिक सहभागिता और साहित्य के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है. साहित्य सृजन संस्थान की यह स्वर्णिम काव्य संध्या इस बात का प्रमाण है कि जब शब्दों के प्रति सम्मान, सृजन के प्रति समर्पण और संवेदनाओं के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहती है, तब साहित्यिक परंपराएं समय के साथ और अधिक सशक्त होती जाती हैं। वृंदावन हॉल में आयोजित यह काव्य संध्या साहित्य, संस्कृति,पत्रकारिता और रचनात्मक अभिव्यक्ति के सुंदर समन्वय के रूप में यादगार बनी. 50वीं काव्य संध्या ने न केवल कवियों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का मंच दिया, बल्कि साहित्यिक मूल्यों को सहेजने और समाज में संवेदना, विचार तथा संस्कारों की ज्योति प्रज्वलित रखने का संदेश भी दिया.साहित्य सृजन की यह स्वर्णिम यात्रा इस विश्वास को और दृढ़ करती है कि शब्द कभी मौन नहीं होते-वे विचार बनकर जन्म लेते हैं, संवेदना बनकर हृदय में उतरते हैं और साहित्य बनकर युगों तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

50वीं काव्य संध्या पर काटा केक

काव्य पाठ और सम्मान कार्यक्रम के बाद समिति के सदस्याें ने साहित्य सृजन की स्वर्णिम यात्रा के अवसर पर केक काटा

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