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Raipur Health News: एमएमआई नारायणा में 8 वर्षीय बच्ची पर दुर्लभ ट्रिपल कार्डियक प्रक्रिया सफल

Raipur Health News: रायपुर। एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 8 वर्षीय बच्ची पर एक जटिल और दुर्लभ ट्रिपल इंटरवेंशनल कार्डियक प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। मात्र 18 किलोग्राम वजन वाली इस बच्ची की पहचान अस्पताल द्वारा आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर के दौरान हुई थी, जिसके बाद उसे विस्तृत जांच के लिए अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान पाया गया कि बच्ची गंभीर पल्मोनरी स्टेनोसिस से पीड़ित थी, जिसमें हृदय से फेफड़ों तक रक्त ले जाने वाला वाल्व अत्यधिक संकरा हो गया था। इसके अलावा, उसे एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एसडी) था, जो हृदय के ऊपरी कक्षों के बीच एक बड़ा छेद होता है, साथ ही जन्मजात कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक (सीएचबी) भी था, जिसके कारण हृदय की धडक़न असामान्य रूप से धीमी हो गई थी।


चरणबद्ध तरीके से पूरी की प्रक्रियाएं
मामले की जटिलता को देखते हुए, बच्ची के लिए चरणबद्ध तरीके से तीन महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं आवश्यक थीं-बैलून वॉल्वुलोप्लास्टी द्वारा संकरे वाल्व को खोलना, ्रस्ष्ठ का डिवाइस के माध्यम से बंद करना, और एक स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि डिवाइस क्लोजर के बाद पेसमेकर का लगाना, क्योंकि तार की हल्की सी भी हिलावट डिवाइस को अस्थिर कर सकती थी, जिससे गंभीर जटिलताएं या आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती थी।
पहला चरण
प्रक्रिया के पहले चरण को डॉ. किंजल, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, ने सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने वॉल्चुलोप्लास्टी और डिवाइस क्लोजर को अत्यंत सटीकता के साथ अंजाम दिया। डॉ. किंजल ने कहा, यह एक अत्यंत जटिल और संवेदनशील मामला था, क्योंकि बच्ची की उम्र कम थी, वजन भी कम था और कई कार्डियक समस्याएं एक साथ मौजूद थीं। इस तरह के मामले में वॉल्चुलोप्लास्टी और डिवाइस क्लोजर करना बेहद सटीकता की मांग करता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पेसमेकर प्रत्यारोपण की योजना बनाना था, ताकि डिवाइस प्रभावित न हो। सावधानीपूर्वक योजना, समन्वय और चिकित्सकीय निर्णय के चलते हम तीनों प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सके।

दूसरा चरण- अगले दिन बच्ची का पेसमेकर प्रत्यारोपण डॉ. सुमन्ता शेखर पाढ़ी, सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड, कार्डियोलॉजी, द्वारा किया गया, जिसमें सिंगल चैंबर कंडक्शन सिस्टम पेसिंग तकनीक का उपयोग किया गया। डॉ. पाढ़ी ने कहा, एक छोटे बच्चे में पेसमेकर लगाना, खासकर डिवाइस क्लोजर के बाद, तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। थोड़ी सी भी गड़बड़ी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती थी। हमने सिंगल चैंबर कंडक्शन सिस्टम पेसिंग का चयन किया, ताकि बच्चे को सुरक्षित और दीर्घकालिक लाभ मिल सके। इस सफलता के पीछे टीमवर्क, सटीक योजना और उन्नत कार्डियक केयर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
तीसरा चरण
दोनों प्रक्रियाएं लोकल एनेस्थीसिया और सेडेशन के तहत की गई, जिसमें एनेस्थीसिया टीम के डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. प्रशांत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी तीनों प्रक्रियाएं बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी हुई और बच्ची को मात्र तीन दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेल्लमकोंडा ने कहा, यह महत्वपूर्ण केस हमारे अस्पताल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें हम सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्नत और जीवनरक्षक उपचार प्रदान करने के लिए समर्पित हैं।

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