
कोरबा में आयोजित स्टेकहोल्डर्स मीट में ‘जस्ट ट्रांजिशन’ एवं माइन क्लोजर पर हुई विस्तृत चर्चा
कोरबा (संवाद साधना ) ।एसईसीएल गेवरा कोयला क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को कोरबा कलेक्टोरेट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC) द्वारा “गेवरा कोल रीजन रिपर्पजिंग” विषय पर हितधारक बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य खनन गतिविधियों में भविष्य में होने वाले बदलावों के अनुरूप क्षेत्र के सतत विकास, स्थानीय समुदाय की भागीदारी तथा रोजगार के नए अवसरों पर विचार-विमर्श करना था।
बैठक में कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत, आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अधिकारी, माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं अन्य हितधारकों सहित लगभग 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कहा कि खदान बंद होने के बाद भी क्षेत्र में रोजगार का पारिस्थितिकी तंत्र एवं आर्थिक अवसर बने रहना आवश्यक है। इसके लिए समयबद्ध एवं प्रभावी जस्ट ट्रांजिशन गतिविधियों का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, जिससे स्थानीय समुदाय को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
आईआईटी कानपुर के प्रो. प्रदीप स्वर्णकार ने वर्ष 2025 के अद्यतन माइन क्लोजर दिशा-निर्देशों के अंतर्गत रिक्लेम फ्रेमवर्क की जानकारी देते हुए कहा कि माइन क्लोजर की भावी योजनाओं में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं एवं जन-आकांक्षाओं को योजनाओं का आधार बनाकर ही खनन के बाद क्षेत्र का संतुलित सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
गेवरा प्रबंधन ने बताया कि वर्ष 1981 में मात्र 5 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन लक्ष्य के साथ प्रारंभ हुई गेवरा खदान आज 70 मिलियन टन पर्यावरणीय स्वीकृति क्षमता तक पहुँच चुकी है, जिससे यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान बन गई है। प्रबंधन ने बताया कि सेटी गेवरा के माध्यम से परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर, CSR के अंतर्गत शिक्षा सहायता तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अनेक गतिविधियाँ पहले से संचालित की जा रही हैं। साथ ही संशोधित माइन क्लोजर दिशा-निर्देशों के अनुसार पाँच-वर्षीय माइन क्लोजर निधि का न्यूनतम 25 प्रतिशत भाग सामुदायिक विकास एवं आजीविका संवर्धन गतिविधियों के लिए आरक्षित किया गया है।
बैठक के दौरान माइन क्लोजर एवं रिपर्पजिंग सेल द्वारा भविष्य की कार्ययोजना तथा सामुदायिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करेगी।



