पंचायत जिम्मेदारों के भ्रष्ट्र कृत्य को जनपद अधिकारियों के संज्ञान में लाने बाद भी चुप्पी साधे बैठे.
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*कोरबा/पाली:-* कहा जाता है जब भ्रष्ट्र सरपंच- सचिव पर अधिकारियों और नेताओं का संरक्षण प्राप्त होता है तो कार्रवाई की तलवार कोसो दूर लटकती है। सरकारी पैसा ही तो है, कौन सा तुम्हारे घर का सरपंच खा रहा है और तुम क्यों समाजसेवी बने पड़े हो, कौन से पंचायत में ऐसा नही होता, सरपंच चुनाव में लाखों खर्च किया है, कहां से वापसी होगी। ऐसे अनर्गल तथ्यों के बीच हम ये सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि क्या सच मे जनपद स्तर पर सरपंच- सचिव को संरक्षण प्राप्त है? क्या जनपद अधिकारियों को सब पता रहता है और राशि निकालने के बाद उन्हें कमीशन की भेंट चढ़ाया जाता है? ऐसे में जब प्रसाद चढ़ गया तो फिर डर काहे का, क्योंकि अंत मे तो जांच अधिकारी भी जनपद स्तर से ही होंगे। इसीलिए शायद मुनगाडीह सरपंच- सचिव बुनियादी विकास की राशि फर्जी बिलों के जरिये बेधड़क निकालकर डकार गए।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 49 के अंतर्गत बने प्रावधान अनुसार ग्राम पंचायतों को मूलभूत कार्यों के संपादित करने का अधिकार सौंपा गया है। राज्य शासन द्वारा द्वितीय छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा को मान्य करते हुए राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व का 6.15 हिस्सा ग्राम पंचायतों के मध्य उनकी जनसंख्या वर्ष 2011 अनुसार वितरण करने का प्रावधान किया गया है। जिससे पंचायतों को प्राप्त राशि से बुनियादी विकास के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जा सके। लेकिन उक्त उद्देश्यों के साथ संचालित किए गए 15वें वित्त आयोग मद की राशि कैसे भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ती है, इसका जीता जागता उदाहरण कोरबा जिले अंतर्गत पाली जनपद के अधीन मुनगाडीह पंचायत में देखने को मिला, जहां के सरपंच- सचिव ने मिलकर मिडिल स्कूल में शौचालय मरम्मत कार्य एवं मजदूरी भुगतान के नाम पर राशि 42 हजार, प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष जीर्णोद्वार पर 68 हजार, प्राथमिक शाला चारपारा में अतिरिक्त कक्ष निर्माण हेतु 17 हजार तथा पंचायत के आश्रित मोहल्ला- बगईनाला, बिंझवारपारा, धनुहारपारा में पेयजल स्रोतों के रखरखाव एवं नए स्रोतों पर कार्य बताकर तत्कालीन सरपंच कार्यकाल में स्थापित सबमर्सिबल पंप, सिंटेक्स कार्य की आड़ में 1.41 लाख निकाल आपस मे बंदरबांट कर लिया। सरपंच- सचिव के मिलीभगत का भ्रष्ट्र कृत्य यहीं नही थमा, बल्कि नाली साफ- सफाई के नाम पर भी बोगस बिलों के सहारे 81 हजार 258 रुपए की राशि 15वें वित्त से सफाया कर दिया गया। जिसमें नाली सफाई कार्य- बस्तीपारा, चारपारा, बंधियापारा जिसके रिचार्ज बाउचर तिथि 02/07/2025 को 48 हजार 342 रुपए, 16/07/2025 में 2 हजार 916 रुपए और 20/02/2026 में 30 हजार की राशि आहरण कर वारा- न्यारा किया गया है। जबकि ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान सरपंच में ग्राम के गलियों और नालियों का साफ- सफाई से दूर तक वास्ता नही है, न ही उन्होंने किसी तरह का सफाई कार्य होते देखा है।
बता दें कि सरपंच- सचिव के सांठगांठ से पंचायत में भ्रष्ट्राचार और गबन के अनेकों मामले सामने आए है, जहां बिना काम कराए 15वें वित्त से लाखों रुपए निकाले गए है और बंदरबांट किया गया है। शासकीय भवनों के नवनिर्माण में भी स्टीमेट के विपरीत गुणवत्ताहीन कार्य को अंजाम दिया गया है। पंचायत जिम्मेदारों द्वारा किये गए भ्रष्ट्राचार मामले को लेकर बीते दिनों *कागजों में हुआ शौचालय मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष निर्माण और जीर्णोद्वार के काम… जमीन पर नही मिला निशान…! सरपंच- सचिव की भूमिका पर बड़े सवाल?* एवं *मुनगाडीह सरपंच- सचिव के भ्रष्ट्राचार की खुल रही परतें : तत्कालीन सरपंच कार्यकाल में हुए पेयजल स्रोतों के काम को वर्तमान का बताकर डकार ली 1.41 लाख की राशि* शीर्षक के साथ दो प्रमुख खबरें प्रसारित कर पाली जनपद पंचायत अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, किंतु वित्तीय अनियमितता के मामले को लेकर संबंधित नौकरशाहों के कानों में जूं तक नही रेंगी और वे इस दिशा में जांच करवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे है। जिनके इस रवैये से एक गाने की बोल याद आ गई कि- गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है। सरपंच- सचिव के और भी भ्रष्ट्र कृत्य को अगले खबर में प्रसारित किया जाएगा, फिलहाल पंचायत में हुए गड़बड़ घोटाले को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत करने की बातें ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है।



