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महिला समूह के अध्यक्ष-सचिव पर एफआईआर

सरायपाली में राशन दुकान घोटाला, लाखों की अनियमितता उजागर

महासमुंद। सरायपाली अंतर्गत ग्राम कुटेला स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे की लिखित शिकायत पर माँ संतोषी महिला स्व-सहायता समूह, लुकापारा की अध्यक्ष सेत कुमारी चौहान एवं सचिव माधुरी चौहान के विरुद्ध थाना सरायपाली में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सरायपाली के आदेश के आधार पर की गई है।

जानकारी के अनुसार, संचालनालय खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, नवा रायपुर से प्राप्त निर्देशों के बाद दुकान का भौतिक सत्यापन कराया गया था। यह दुकान सितंबर 2023 से संबंधित महिला समूह द्वारा संचालित की जा रही थी।20 अप्रैल 2025 को किए गए निरीक्षण में ई-पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भंडार के बीच भारी अंतर पाया गया। जांच में 130.52 क्विंटल चावल, 3.51 क्विंटल शक्कर और 3.41 क्विंटल नमक की कमी सामने आई, जिसकी कुल कीमत 5.61 लाख रुपये से अधिक आंकी गई। निरीक्षण के दौरान दुकान में आवश्यक अभिलेख जैसे स्टॉक पंजी, निगरानी पंजी, डीओ पंजी, केशबुक और राशन कार्ड पंजी तक उपलब्ध नहीं पाए गए। दुकान के संचालन समय का भी कहीं उल्लेख नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि पात्र हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं दिया जा रहा था। आरोप है कि खाद्यान्न को बाहरी लोगों को बेचकर अवैध लाभ कमाया जा रहा था, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) प्रभावित हुई।ग्रामीणों की शिकायत पर 23 जनवरी 2026 को पुनः सत्यापन किया गया, जिसमें स्थिति और भी गंभीर पाई गई। इस दौरान 186.92 क्विंटल चावल, 1.26 क्विंटल शक्कर और 1.84 क्विंटल नमक कम पाया गया। साथ ही जनवरी 2026 का 19,065 रुपये का आबंटन भी जमा नहीं किया गया था।

*नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब*

प्रशासन ने जून 2025 में संबंधित पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद 5.61 लाख रुपये की वसूली का आदेश भी जारी किया गया, जिसे अब तक जमा नहीं कराया गया है। खाद्य निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि इस कृत्य से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ है और पीडीएस व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।

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