रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के अंतर्गत पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर धर्मसभा में 11 सितंबर को भगवान महावीर के जीवन चरित्र और उनके पूर्व भवों का वांचन किया गया। मुनि संवेगरत्न सागर ने कल्पसूत्र ग्रंथ के माध्यम से परमात्मा के 27 भवों के चरित्र और सम्यक ज्ञान का वांचन किया।
मुनिश्री ने बताया कि जैन परंपरा में इन 14 महास्वप्नों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। भगवान के जन्म से पहले माता त्रिशला द्वारा देखे गए इन स्वप्नों को परमात्मा के आगमन के शुभ संकेत के रूप में माना जाता है। जन्मवांचन के दौरान इन महास्वप्नों के धार्मिक महत्व और उनके संदेश को श्रद्धालुओं के समक्ष विस्तार से रखा जाएगा।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया ने बताया कि 12 सितंबर को दोपहर 2 बजे भगवान महावीर के जन्म का वांचन किया जाएगा। इस दौरान भगवान के जन्म प्रसंग के साथ माता त्रिशला देवी को प्रभु के जन्म से पूर्व दिखाई दिए 14 महास्वप्नों का भी वर्णन किया जाएगा। पर्युषण महापर्व में परमात्मा के विशेष जन्मवांचन को लेकर श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह है। धर्मसभा में भगवान महावीर के जन्म प्रसंग के साथ उनके जीवन संदेश और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की सीख मुनिश्री के मुखारविंद से दी जाएगी।
चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि पर्युषण महापर्व के दौरान प्रतिदिन धर्मसभा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर मुनिश्री के मुखारविंद से जिनवाणी का लाभ ले रहे हैं। भगवान महावीर के जन्मवांचन का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर है। इस दौरान भगवान के जन्म से जुड़े प्रसंगों के साथ माता त्रिशला के 14 महास्वप्नों का वांचन किया जाएगा। श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में धर्मसभा में शामिल होकर इस पावन प्रसंग का लाभ लेने का आग्रह किया गया है।



