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Health News Raipur: PMOS के बावजूद माँ बनना संभव, सही इलाज और जीवनशैली है जरूरी: डॉ. रिचा चौबे

 Health News Raipur:   रायपुर। PMOS (पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम) जागरूकता माह के अवसर पर महिलाओं में तेजी से बढ़ रही इस हार्मोनल समस्या को लेकर विशेषज्ञों ने जागरूकता पर जोर दिया है। एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, रायपुर की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनोकोलॉजी डॉ. रिचा चौबे ने कहा कि PMOS जिसे पहले PCOS कहा जाता था, आज हर पांच में से एक महिला को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद सही समय पर इलाज से गर्भधारण संभव है।

डॉ. चौबे ने बताया कि JAMA नेटवर्क ओपन में प्रकाशित ICMR-PCOS स्टडी के अनुसार 2018 से 2022 के बीच देशभर की 10,000 महिलाओं पर हुए अध्ययन में 18 से 40 वर्ष की 19.6 प्रतिशत महिलाएं PCOS से पीड़ित पाई गईं। इनमें से 91.9 प्रतिशत में ब्लड फैट असामान्य, 43.2 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त और लगभग 25 प्रतिशत मेटाबोलिक सिंड्रोम के मानदंडों को पूरा करती थीं।

क्या है PMOS और गर्भावस्था पर असर?
डॉ. रिचा चौबे के अनुसार PMOS ओवरी में हार्मोनल असंतुलन की स्थिति है। इसमें मासिक धर्म अनियमित होना, ओव्यूलेशन का समय निश्चित न होना और कई बार ओवरी में सिस्ट होना मुख्य लक्षण हैं। यह पिट्यूटरी ग्रंथि के संकेतों को बाधित करता है, जिससे अंडे नहीं बनते और ओव्यूलेशन रुक जाता है। यह महिलाओं में बांझपन का एक बड़ा कारण है। पीरियड आने का मतलब हमेशा ओव्यूलेशन होना नहीं होता।

PMOS में भी गर्भवती होना संभव है
डॉ. चौबे ने कहा कि PMOS जीवन भर रहने वाली स्थिति है और गर्भावस्था से यह ठीक नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं माँ बन सकती हैं। इसके लिए कुछ उपाय जरूरी हैं:

1. वजन नियंत्रण: रिसर्च के अनुसार 50 से 80 प्रतिशत PMOS पीड़ित महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं। 6 महीने में 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करने से भी ओव्यूलेशन फिर से शुरू हो सकता है।

2. दवाओं से इलाज: डॉक्टर की सलाह से लेट्रोजोल, क्लोमीफीन जैसी दवाएं ओव्यूलेशन को बढ़ावा देती हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए मेटफॉर्मिन भी कारगर है।

3. एडवांस तकनीक: जब प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव न हो तो IVF, ICSI, एग फ्रीजिंग और डोनर एग/स्पर्म जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) मददगार होती है।

डॉ. चौबे ने कहा कि सही वजन बनाए रखना, ब्लड शुगर संतुलित रखना, पौष्टिक भोजन और रोजाना व्यायाम से PMOS को नियंत्रित कर स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना बढ़ाई जा सकती है। किसी भी दवा को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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