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Pustak ki vimochan: वरिष्ठ साहित्यकार चेतन भारती की ‘अभिव्यक्ति की मर्यादा’ और ‘पेंशनर्स संघर्ष यात्रा’ की पुस्तक का विमोचन

Pustak ki vimochan: रायपुर। संकेत साहित्य समिति के बैनर तले वृंदावन हॉल, रायपुर में शुक्रवार दिनांक 16 अक्टूबर को वरिष्ठ साहित्यकार चेतन भारती की दो कृतियों – ‘अभिव्यक्ति की मर्यादा’ और ‘पेंशनर्स संघर्ष यात्रा’ का विमोचन सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. चित्तरंजन कर, कार्यक्रम अध्यक्ष श्री गिरीश पंकज, विशिष्ट अतिथि द्वय श्री डुमनलाल ध्रुव व श्री सुरेंद्र रावल एवं समिति के संस्थापक व प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ के कर-कमलों से विमोचन हुआ।कार्यक्रम के आरंभ में माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के पश्चात अतिथियों एवं लेखक का अंगवस्त्र एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।अपनी कृतियों पर प्रकाश डालते हुए चेतन भारती ने कहा कि पेंशनधारियों की पीड़ा एवं अभिव्यक्ति की आजादी की हो रही सरेआम अवहेलना ने मुझे इस विषय पर लिखने के लिए प्रेरित किया।डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि चेतन भारती का चिंतन हवाई न होकर जमीन एवं परिवेश से जुड़ा है। सतह से शिखर तक की यात्रा उन्होंने अपने बलबूते पूरी की है। चिंतन से विचार एवं विचार से इच्छाएँ जन्म लेती हैं। भारती द्वारा प्रयुक्त भाषा एवं कथ्य में पूरी ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा झलकती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गिरीश पंकज ने कहा कि ‘अभिव्यक्ति की मर्यादा’ के पक्षधर लेखक चेतन भारती अपनी इच्छाशक्ति के अनुसार सबकी अपनी कहानी कहते हैं।

दरअसल अनुभव ही सच्चा ज्ञान है। आपने लंबा संघर्ष करके पेंशनरों को न्याय दिलाया।मुख्य अतिथि डॉ. कर ने कहा कि मनुष्य जन्म लेने से व्यक्ति नहीं होता, जो व्यक्त होता है वही व्यक्ति कहलाता है। अभिव्यक्ति मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है और जो लोग उसकी मर्यादा का ध्यान रखते हैं, वो हमेशा लोगों के प्रिय पात्र बने रहते हैं।विशिष्ट अतिथि डुमनलाल ध्रुव ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि विचारों की गरिमा और सामाजिक उत्तरदायित्व अभिव्यक्ति की मर्यादा होती है। साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने और जीवन-मूल्यों की स्थापना करने का सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम का सफल संचालन पल्लवी झा ‘रूमा’ ने किया। प्रांत के विभिन्न जिलों से आए रचनाकारों में डॉ. चितरंजन कर, गिरीश पंकज, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, डुमनलाल ध्रुव, रामेश्वर शर्मा, राजेश जैन ‘राही’, उदयभान सिंह चौहान, सुरेन्द्र रावल, संजीव ठाकुर, डॉ. रविन्द्र सरकार, डॉ. महेंद्र कुमार ठाकुर, पल्लवी झा ‘रूमा’, पूर्वा श्रीवास्तव, सुषमा पटेल, हरीश कोटक, राजकुमार सोनी, छबिलाल सोनी, गणेशदत्त झा, यशवंत यदु, राजेन्द्र रायपुरी, विवेक राहटगाँवकर, एच.एल. चन्द्राकर, डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव, राजेन्द्र ओझा, कुमार जगदली, नर्मदाप्रसाद विश्वकर्मा, माधुरी कर, मुरलीधर गोंडाने ‘नीर’, कल्याणी तिवारी ‘कोकि’, गोपाल सोलंकी, मंजूषा अग्रवाल, शशांक खरे, शकुंतला तरार, जुगल किशोर सेन, रवि भोई, आर.बी. साहू, रामस्वरूप साहू, लतिका भावे, लतिका साहू, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, उदयराम साहू, चन्द्रशेखर साहू, वीरेंद्र सिंह साहू, नीलिमा मिश्रा, डॉ. गोपा शर्मा, अनिता झा एवं शकुंतला तिवारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।काव्य गोष्ठी की प्रमुख प्रस्तुतियांकाव्य गोष्ठी में विविध विधाओं की रोचक रचनाओं का पाठ किया गया।कार्यक्रम के अंत में श्री कुलदीप भारती ने आमंत्रित अतिथियों एवं रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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