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सत्संग ही वह पारस पत्थर है जिससे आदमी ज्ञान का सोना प्राप्त कर लेता है – अमोही साहेब जीवन में उन्नति के लिए सेवा,समर्पण, वैराग्य जैसे गुणों को जागृत करें -बलबीर साहेब

महासमुंद। स्थानी रायपुर रोड स्थित कबीर आश्रम में चल रहे बीजक सत्संग के अंतिम दिन बुरहानपुर से पधारे संत अमोही साहेब  ने सदगुरु कबीर साहेब प्रसिद्ध साखी अमृत केरी पूरिया, बहु विधि दिन्हा छोर से शुरुआत करते हुए कहा कि कुछ ऐसी वस्तु है जिनका नाम है पर रूप नहीं है। इसी प्रसंग को आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि अमृत नाम की कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे खाकर व्यक्ति अमर हो जाए, अमृत यह अविनाशी आत्मा है।दूसरी वस्तु है कल्पवृक्ष, कल्पवृक्ष जैसी कोई वस्तु नहीं है जिससे कल्पना करें वह वस्तु मिल जाए।कल्पवृक्ष है हमारी बुद्धि जिससे हम कल्पना कर आविष्कार और आध्यात्मिक  चिंतन करते हैं।इसी तरह पारस पत्थर नाम की कोई ऐसी वस्तु नहीं है कि लोहे को छुआ देने से  वह सोना बन जाए। सही मायने में पारस वह सत्संग है जिसके स्पर्श से आदमी ज्ञानी बन जाता है। उसी प्रकार चौथी है कामधेनु गाय, जिससे सब कुछ प्राप्त कर लो। वास्तव में कामधेनु है हमारा पुरुषार्थ जिससे हम सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह बताया अमृत की पूरियां है भक्ति,ज्ञान और वैराग्य। भक्ति से हृदय शुद्ध होता है,ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है और वैराग्य से अंतःकरण शुद्ध होता है। इसी से प्रत्येक जीव को शांति मिलती है। कबीर साहेब कहते हैं कि ज्ञान वैराग्य की चर्चा ही  अमृत की पूरियां है। संत अमोही साहेब ने कहा कि  संसार में चार प्रकार के सुख होते हैं।पहले विषय भोग का सुख अच्छा लगता है बाद में दुख देता है।  भक्ति का सुख ऐसा है कि भक्ति व्यक्ति बुरे कर्म से बच जाता है। इसी तरह  ज्ञान का सुख आदमी  को सत्य का बोध कराता है।वैराग्य के सुख से वासनाओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है।संत बलवीर साहब ने कहा कि जीवन में उन्नति चाहिए तो सेवा, समर्पण, वैराग्य और सत पुरुषार्थ  के गुणों को चरितार्थ करना पड़ेगा।
 सेवा की भावना को जागृत करने के लिए प्रेम और दया हमारे दिल में होना चाहिए। समर्पण भाव को जागृत करने के लिए श्रद्धा और विश्वास हमारे दिल में होना चाहिए। वैराग्य को जागृत करने के लिए ज्ञान और संतों का सानिध्य होना चाहिए। सतपुरुषार्थ की भावना को जागृत करने के लिए विवेक और विचार हमारे अंदर होना चाहिए, इसी से शांति,स्थिरता, एकाग्रता और मुक्ति की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम शुभारम्भ भुनेश्वर साहेब  मधुर भजनों से हुआ। रमेश साहेब,गुरुसुख साहेब,विजय रतन साहेब, रतन साहेब, निकेश्वर साहेब,पूनम साहब, पंकज साहेब  आदि संतों ने ज्ञान चर्चा किया। कार्यक्रम में गढ़सिवनी, पीढ़ी, तुमगांव, पसौद,  मचेवा, कोसरंगी, शेर, लाफिन, झालखम्हरिया, पचेड़ा एवं  महासमुंद आदि के सत्संग प्रेमी मौजूद थे।प्रमुख रूप से नंद कुमार साहू, मुकुंद साहू, तुलाराम साहू, रामकुमार साहू,भगत राम देवांगन, उत्तम साहू, लक्ष्मीराम साहू,यतिराम साहू आदि की सहभागिता रही।

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