महतारी वंदन के नाम पर महिलाओं से छल! 70 लाख से घटकर 68 लाख कैसे हुए हितग्राही?
महासमुंद। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की महतारी वंदन योजना को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री एवं महासमुंद विधानसभा की 2023 की कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रश्मि चंद्राकर, पूर्व जिलाध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी महासमुंद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या लगभग 70 लाख से घटकर 68 लाख कैसे रह गई? यदि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, तो नई पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए पोर्टल क्यों नहीं खोला जा रहा है? वहीं, पहले से योजना का लाभ ले रही महिलाओं के नाम किन कारणों से काटे जा रहे हैं?
डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि महतारी वंदन योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने वाली योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था। लेकिन योजना के क्रियान्वयन को लेकर सामने आ रहे सवालों का सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब वास्तविक पात्र महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचे और किसी भी पात्र महिला को अनावश्यक रूप से योजना से वंचित न होना पड़े।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में योजना का पोर्टल खुलने के दौरान लगभग 70 लाख महिलाओं के हितग्राही होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया गया। वर्ष 2024, 2025 और 2026 के दौरान अनेक परिवारों में विवाह हुए और नई महिलाएं पात्रता की शर्तें पूरी करने की स्थिति में आई होंगी। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि नई पात्र महिलाओं को आवेदन करने और योजना से जुड़ने का अवसर कब मिलेगा?
डॉ. चंद्राकर ने सवाल किया कि जब समय के साथ पात्र महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना है, तब हितग्राहियों की संख्या लगभग 70 लाख से घटकर 68 लाख कैसे हो गई? क्या सरकार ने इस संबंध में कोई विस्तृत सर्वेक्षण कराया है? यदि पुराने हितग्राहियों के नाम हटाए गए हैं, तो उसके कारण क्या हैं? कितनी महिलाओं के नाम हटाए गए और कितनी महिलाओं को अब भी योजना का लाभ मिल रहा है? सरकार को इन सभी सवालों पर आंकड़ों सहित स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि एक ओर नई पात्र महिलाओं के लिए पोर्टल बंद होने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से लाभ प्राप्त कर रही महिलाओं की संख्या में कमी बताई जा रही है। यदि कोई महिला निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती है, तो उसे योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का अवसर मिलना चाहिए। पात्रता की समीक्षा आवश्यक हो सकती है, लेकिन ऐसी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसका कारण भी बताया जाना चाहिए।
डॉ. रश्मि चंद्राकर ने सरकार से पूछा कि आखिर लगभग दो लाख महिलाओं के नाम किस आधार पर कम हुए? क्या इन महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है, क्या उन्होंने स्वयं योजना का लाभ लेना बंद किया है, या हितग्राहियों की संख्या में कमी के पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 70 लाख और 68 लाख के आंकड़े किस अवधि के हैं तथा इन आंकड़ों में अंतर आने का वास्तविक कारण क्या है।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से जुड़ी महिलाओं को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह आर्थिक सहायता उनके घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरतों और दैनिक जीवन से जुड़ी हो सकती है। इसलिए योजना के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि किसी पात्र महिला को तकनीकी, प्रशासनिक या दस्तावेजी कारणों से लाभ नहीं मिल रहा है, तो उसकी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
डॉ. चंद्राकर ने मांग की कि सरकार महतारी वंदन योजना के पोर्टल को नई पात्र महिलाओं के आवेदन के लिए खोलने पर स्पष्ट निर्णय ले। साथ ही, योजना के प्रारंभ से अब तक हितग्राहियों की संख्या में हुए बदलाव का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। कितनी महिलाओं को योजना में शामिल किया गया, कितने नाम हटाए गए, नाम हटाने के क्या कारण रहे और वर्तमान में कितनी महिलाएं नियमित रूप से लाभ प्राप्त कर रही हैं—इन सभी सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं, उनके लिए शिकायत दर्ज कराने और पात्रता की दोबारा जांच कराने की सरल व्यवस्था होनी चाहिए। यदि किसी पात्र महिला का नाम गलती से हटाया गया है, तो उसे दोबारा योजना से जोड़ने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। नई विवाहित महिलाओं सहित अन्य सभी पात्र महिलाओं को भी आवेदन का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि पात्रता के आधार पर किसी के साथ अन्याय न हो।
डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि सरकार को केवल योजना की उपलब्धियां गिनाने के बजाय उसके क्रियान्वयन से जुड़े सवालों का जवाब भी देना चाहिए। महिलाओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके लिए घोषित योजना में नए आवेदन क्यों नहीं लिए जा रहे हैं और हितग्राहियों की संख्या में कमी के पीछे क्या कारण हैं। यदि सरकार की मंशा वास्तव में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की है, तो उसे इन सवालों पर पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
डॉ. चंद्राकर ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि महतारी वंदन योजना में नई पात्र महिलाओं के आवेदन कब शुरू होंगे और लगभग दो लाख हितग्राहियों की कमी के पीछे वास्तविक कारण क्या है। महिलाओं को आश्वासन नहीं, स्पष्ट जवाब और पात्रता के अनुरूप योजना का लाभ मिलना चाहिए।



