विधेयक के माध्यम से परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का किया जा रहा था प्रयास: द्वारिकाधीश
महासमुंद। भारतीय जनता पार्टी द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन नहीं किया, जिससे यह संसद में पारित नहीं हो सका, जबकि हकीकत इससे अलग है। उक्त बातें पत्रकारवार्ता के दौरान आज कांग्रेस भवन में खल्लारी विधायक व कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने कही।मालूम हो कि देश में महिला आरक्षण को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। श्री यादव ने कहा कि दरअसल, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ के नाम से चर्चित 106वां संविधान संशोधन विधेयक वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के साथ ही यह कानून का रूप भी ले चुका है। हाल ही में 16 अप्रैल को संसद में प्रस्तुत 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी विवाद गहराया हुआ है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिला आरक्षण से सीधे तौर पर संबंधित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रयास किया जा रहा था। भाजपा जनता के बीच भ्रम फैला रही है। संसद में जो विधेयक गिरा वह लोकसभा परिसीमन की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जानी थीं। साथ ही परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई थी। विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब 2026-27 की नई जनगणना प्रस्तावित है और जातिगत जनगणना की चर्चा भी चल रही है, तो पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना तर्कसंगत नहीं है। यदि महिला आरक्षण को तत्काल लागू करना ही उद्देश्य है, तो फिर वर्तमान सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता जिसके लिए कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल तैयार है। द्वारिकाधीश ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को आगे रखकर अपने अनुकूल परिसीमन कराने की रणनीति पर काम कर रही थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता के कारण सफलता नहीं मिल सकी। पत्रकारवार्ता में सरायपाली विधायक चातुरी नंद, नपाध्यक्ष निखिलकांत साहू, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, ब्लाक शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला, पूर्व अध्यक्ष रश्मि चंद्राकर, पूर्व नपाध्यक्ष राशि महिलांग शामिल थे।
*कांग्रेस महिला आरक्षण की समर्थक*
विधायक द्वारिकाधीश ने कहा कि इतिहास पर नजर डालें तो पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की पहल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1989 में की थी। हालांकि वह विधेयक उस समय राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। बाद 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में यह व्यवस्था लागू हुई, जिससे आज देशभर में लाखों महिलाएं स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के लिए 2010 में भी प्रयास हुए, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था।



