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बीईओ पर भ्रष्टाचार, तानाशाही और अवैध वसूली का आरोप

सर्व शिक्षक संघ ने घेरा बीईओ कार्यालय, लीलाधर सिन्हा को हटाने व उच्चस्तरीय जांच की मांग

महासमुंद । विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) महासमुंद की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण रवैये और तानाशाही से आक्रोशित सर्व शिक्षक संघ ने आज बुधवार को बीईओ कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी करते हुए बीईओ लीलाधर सिन्हा को तत्काल हटाने, मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक टेकराम सेन, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष ईश्वर चंद्राकर, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सिराज बक्श एवं छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष नारायण चौधरी ने आरोप लगाया कि बीईओ द्वारा लंबे समय से शिक्षकों व कर्मचारियों को मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरा है, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि बीईओ के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें संतान पालन अवकाश के नाम पर अवैध वसूली, ऑनलाइन आवेदनों की अनदेखी, स्टेशनरी वितरण में अनियमितता, चुनिंदा लोगों को ही अवकाश स्वीकृति, कार्यालय व्यय में गड़बड़ी, फर्जी बिल, नियम विरुद्ध यात्रा भत्ता और नियमों का उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो 27 अप्रैल से बीईओ कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर लोहिया चौक से मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा सत्याग्रह किया जाएगा। संघ ने अपनी मांगों को लेकर विधायक, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को भी ज्ञापन सौंपने की बात कही है।

*महिला शिक्षक ने लगाया अवकाश के बदले रिश्वत मांगने का आरोप*

घेराव के दौरान शासकीय उच्च प्राथमिक स्कूल मुढ़ेना में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती सविता साहू ने बीईओ लीलाधर सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि अपने पुत्र की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी 2026 के दौरान देखभाल के लिए उन्होंने 6 नवंबर 2025 को “संतान पालन अवकाश” हेतु ऑनलाइन आवेदन किया था। शिक्षिका के अनुसार, अवकाश स्वीकृति के लिए उनसे प्रति माह 5000 रुपये की दर से तीन माह की राशि मांगी गई। संघ पदाधिकारियों से चर्चा के बाद उन्हें केवल 30 दिन का अवकाश “खंड-खंड” में स्वीकृत किया गया। इसके बाद 7 जनवरी 2026 को पुनः आवेदन करने पर भी, राशि न देने के कारण उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि ऐसा एक नहीं, बल्कि तीन बार हुआ।

वर्सन

महिला शिक्षक को उनके आवेदन पर एक बार अवकाश स्वीकृत किया गया था। जब उन्होंने दूसरी बार अवकाश के लिए आवेदन किया तो उक्त तिथियों में स्कूलों की परीक्षा संचालित होनी थी इसलिए उनका अवकाश अस्वीकार किया गया। इसलिए वे अवकाश के एवज राशि की मांग का बेबुनियाद आरोप लगा रही है। सर्व शिक्षक संघ के सभी आरोप निराधार है।

लीलाधर सिन्हा

बीईओ , महासमुंद।

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