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CG News: बैलगाड़ी में बारात, सादगी की पहचान, पारंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम

CG News: सादगी और परंपरा की मिसाल पेश की, तामझाम से बनाई दूरी

CG News: रायपुर। लग्जरी कारों की चमक उस वक्त फिकी पढ़ी जब कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक के ग्राम चवाड़ निवासी कचरू सलाम ने अपनी बारात बैलगाड़ी से निकाली। सादगी और परंपरा की मिसाल पेश की है। शादी को खास बनाने के लिए आधुनिक तामझाम से दूरी बनाई और पारंपरिक तरीके को अपनाया। उन्होंने बैलगाड़ी में बारात निकालने का फैसला लिया। कचरू अपनी बारातियों के साथ 2 से 3 बैलगाडिय़ों में सवार होकर करीब 6 से 7 किलोमीटर का सफर तय करते हुए ग्राम ढेकूना पहुंचे। इस अनोखी बारात का रास्तेभर ग्रामीणों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। गांव के लोग भी इस परंपरागत बारात का हिस्सा बने और बैलगाडिय़ों में सवार होकर खुशी-खुशी शामिल हुए। आधुनिक दौर में देसी अंदाज में निकली इस बारात ने जहां बुजुर्गों को पुराने दिनों की याद दिला दी, वहीं युवाओं के बीच भी यह पहल खास आकर्षण का केंद्र बनी रही।


CG News: आने वाली पीढ़ी को परंपराओं से जोडक़र रखना उद्देश्य
दूल्हे कचरू सलाम ने बताया कि बैलगाड़ी से बारात निकालना उनकी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इससे फिजूल खर्च से बचाव होता है और हमारी संस्कृति भी जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोडक़र रखना है। लग्जरी कारों और दिखावे के इस दौर में बैलगाड़ी से निकली यह बारात एक मजबूत संदेश दे रही है कि सादगी में भी खुशियां पूरी तरह मौजूद होती हैं। यह पहल न केवल खर्चीली शादियों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के लिए भी प्रेरित करती है। कचरू सलाम की यह अनोखी बारात अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रही है।

CG News: दुल्हन बारात लेकर दुल्हे के घर पहुंची, विदाई पर दुल्हा फूट-फूट कर रोया
आपने अक्सर शादी की परंपराओं में दुल्हे की बारात देखी होगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की एक शादी में दुल्हन बारात लेकर दुल्हे के घर पहुंची। यह अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी गई है। परंपरा के उलट दुल्हन देवमुनि एक्का खुद बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंची। मसीही रीति-रिवाज के तहत संपन्न इस विवाह में कन्यादान की जगह ‘वरदान’ हुआ. सबसे खास बात यह रही कि दूल्हे की विदाई की गई और वह फूट-फूटकर रोया। दुल्हन का एक भी भाई नहीं है, पिता खेती किसानी का काम करते हैं। ऐसे में दुल्हन के पिता किसी बेटे की तलाश में थे, और जब अपनी बेटी का रिश्ता बरवा परिवार से हाथ मिलाया तो शादी में अनोखी रस्में निभाई गई। दुल्हे की जगह दुल्हन बारात लेकर दुल्हा को लेने आई और शाम मसी रितिवाज के मुताबिक विदाई हुई।

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