खेतों में भरा पानी, फसलों में रोग व सड़न की आशंका
महासमुंद। मंगलवार शाम तेज हवा के साथ जमकर बरसात से भीषण गर्मी से राहत तो मिली । लेकिन , बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। असमय हुई तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे रबी सीजन की धान फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई स्थानों पर खेत तालाब जैसे नजर आ रहे हैं और खड़ी फसल पानी में गिर गई है, जिससे उसमें रोग लगने व सड़न की आशंका बढ़ गई है। बता दें कि पूर्वी मध्यप्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। जो समुद्री तल से करीब 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला है। इसके साथ ही आंतरिक ओड़िशा और आसपास के क्षेत्रों में भी 0.7 किलोमीटर ऊंचाई पर एक अन्य चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है। इन दोनों सिस्टम के प्रभाव से मंगलवार शाम अचानक मौसम में बदलाव हुआ और जिले में जमकर बारिश हुई । बारिश से जहाँ लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली पर बेमौसम बरसात ने किसानों के सामने समस्या खड़ी कर दी। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम कौंदकेरा, मुस्की, सोरिद, बनसिवनी, कांपा, परसवानी, बेमचा, खट्टीडीह व आसपास के कई गांवों में लगी रबी फसल धान अंधड़ और तेज बारिश से खेतों में गिर गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से जानकारी मिल रही है कि जिले की कई स्थानों में किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मेहनत और लागत से धान की खेती की थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जलभराव के कारण फसल की जड़ें सड़ने व रोग लगने की आशंका है, जिससे उत्पादन पर भारी असर पड़ने की आशंका है।
*क्षेत्र में 60-70 प्रतिशत धान बर्बाद: योगेश्वर*
कौंदकेरा निवासी योगेश्वर चंद्राकर ने बताया कि चार साल बाद रबी फसल के लिए कोडार से पानी दिया गया था। जिससे किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद थी। पर, मंगलवार को हुई अंधड़ से क्षेत्र की 60-70 प्रतिशत फसल खेतों में गिर गई व तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया है। दो-तीन दिनों में कटाई शुरू होने वाली थी पर वह अब पिछड़ गई है। फसल गिरने से उसमें रोग लगने व सड़ने की आशंका बढ़ गई है बारिश के कारण करीब 60-70 एकड़ की खड़ी फसल बर्बाद होने की आशंका है।
*पूरी लागत पानी में डूब गई: मुरली चंद्राकर*
कौंदकेरा के किसान मुरली चंद्राकर ने बताया कि वे भूमिहीन हैं। रेगहा पर 3 एकड़ में धान की फसल ली थी। दवाई, पानी और खाद में बहुत खर्च हुआ। जब फसल काटने की बारी आई, तो बेमौसम बारिश ने पूरी लागत पानी में डूबो दी। ऐसी स्थिति में मुझे क्या मिलेगा और भू स्वामी को क्या दूंगा, समझ से परे है। अब सरकार से ही मुआवजा की उम्मीद है।
*पूरी मेहनत बेकार: नारायण ध्रुव*
किसान नारायण ध्रुव ने बताया कि धान फसल पककर तैयार थी, पर अचानक बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया । फसल तैयार करने, उसे बचाने में हजारों रुपए खर्च हो गये पर अब नुकसान ही है। बनसिवनी के किसान नीलम ध्रुव ने बताया कि हमारे गांव में करीब 30 एकड़ धान की फसल प्रभावित हुई है। मुस्की के देवा साहू और कांपा के किशन प्रजापति ने बताया कि हमारे गांव में लगभग 60-70 प्रतिशत धान फसल खराब होने की आशंका है।
*सबसे अधिक कोमाखान में हुई बारिश*
जानकारी के अनुसार मंगलवार को जिले में 17.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी । जिसमें कोमाखान में सबसे अधिक 32.6 मिमी, बागबाहरा में 25 मिमी, महासमुंद में 22.0 मिमी, बसना में 12.6 मिमी, पिथौरा में 10.1 मिमी और सरायपाली में सबसे कम 2 मिमी बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो- तीन दिनों में अंधड़ व बारिश की संभावना बनी हुई है।



