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करोड़ों खर्च, फिर भी शुद्ध पेयजल को तरसे नौनिहाल

महासमुंद के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में शो-पीस बने आर ओ  और वाटर प्यूरीफायर यूनिट

महासमुंद। बच्चों को शुद्ध व स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाए गए आरओ और वाटर प्यूरीफायर यूनिट अब महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। जिले के अधिकांश केंद्रों में ये यूनिट या तो अब तक इंस्टॉल ही नहीं किए गए हैं, या फिर स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं। नतीजतन, नौनिहालों को स्वच्छ पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्पष्ट है कि विभागीय अनदेखी और ठेकेदार की उदासीनता के चलते सरकार की यह महत्त्वपूर्ण योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है।

बता दें कि यह स्थिति सरकार की महत्त्वपूर्ण सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र 2.0 योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाना है। योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए आरओ, वाटर प्यूरीफायर और एलईडी टीवी उपलब्ध जाना है। जानकारी के अनुसार योजना के तहत जिले के 1795 आंगनबाडी केन्द्रों में से 1240 केन्द्रों में महिला बाल विकास विभाग संचालनालय से 600 नग आर ओ और जिला खनिज न्यास मद से जेम पोर्टल के माध्यम से वर्धमान टेक्नोलॉजी को ठेका मिला था। उनके द्वारा 640 नग वाटर प्यूरीफायर यूनिट का वितरण किया गया है। लेकिन जिला मुख्यालय सहित जिले के अन्य ब्लाक में अधिकांश आंगनबाडी केन्द्र में महीनों बीतने के बाद भी कहीं यह इंस्टॉल नहीं हुआ तो कहीं पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बच्चों को शुद्ध व स्वच्छ पेजजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

*जमीनी हकीकत: निरीक्षण में खुली पोल*

संवाद साधना टीम द्वारा जिला मुख्यालय से लगे ग्राम परसकोल, बरौडा बाजार और शहर के वार्ड 28 स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। परसकोल में वाटर प्यूरीफायर लगा जरूर है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने से बंद पड़ा है। कार्यकर्ता सुमित्रा सोनवानी ने बताया कि हमारे यहाँ वाटर प्यूरीफायर यूनिट की फिटिंग तो हुई है पर पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। बरौडा बाजार कार्यकर्ता व छग आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायिका संघ की अध्यक्ष द्रौपदी साहू ने बताया कि हमारे गांव में तीन केंद्रों में से केवल एक में आर ओ चालू है, बाकी पानी के अभाव में बंद पड़ा है। कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास स्थित केंद्र की सहायिका सरिता साहू ने बताया कि एक साल पहले यह मिला था। पर अब तक फिटिंग करने कोई नहीं आया। वार्ड 28 के एक अन्य सक्षम आंगनबाडी केंद्र की कार्यकर्ता शर्मिला ठाकरे ने बताया कि यहाँ पानी की व्यवस्था न होने कारण यह लगा ही नहीं है।

*शहरी क्षेत्र में यह हाल तो जिले में क्या होगा ?*

जिला मुख्यालय में सुपवाइजर पद पर कार्यरत श्रीमती कुंती यादव ने बताया कि मेरे अंडर में 20 आंगनबाडी केन्द्र है। जिनमें से 15 केन्द्रों को आर ओ वितरण किया गया। इनमें से केवल 3 ही चालू है शेष 12 बंद है। सुपरवाइजर रितु सिन्हा ने बताया कि हमारे 23 केन्द्रों में से 11 केन्द्रों को आर ओ दिया गया है। पर, सभी बंद है। इसी प्रकार सुपवाइजर शीला प्रधान ने बताया कि उनके अधीनस्थ 24 आंगनबाडी केन्द्र है जिनमें 14 को आर ओ मिला था। इनमें 7 केन्द्रों के बच्चों शुद्ध पेयजल मिल रहा है शेष 7 बंद है। यहाँ सवाल यह उठता है कि जब जिला मुख्यालय में ही यह स्थिति है, तो दूरस्थ ब्लॉकों और ग्रामीण क्षेत्रों में हालात कितने बदतर होंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

बाक्स-

केन्द्रों में नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल

जनपद पंचायत सदस्य सुधा योगेश्वर चंद्राकर ने कहा कि जिले के आंगनबाडी केन्द्रों में शासन ने करोड़ों रूपये खर्च कर आर ओ और वाटर प्यूरीफायर यूनिट का वितरण किया है। पर, विभागीय लापरवाही के चलते अधिकांश आंगनबाडी केन्द्रों में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा । जिससे बच्चों को शुद्ध व स्वच्छ पेयजल से वंचित होना पड रहा है। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द इस मामले में उचित कार्यवाई कर सभी आंगनबाडी केन्द्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराई जाए।

वर्सन-

यह मामल संज्ञान में आया है कि आंगनबाडी केन्द्रों में शुद्ध व स्वच्छ पेयजल प्रदाय हेतु आर ओ और वाटर प्यूरीफायर यूनिट का वितरण किया गया है। पर, शिकायत मिल रही है कि क ई केन्द्रों में पानी की उचित व्यवस्था व आर ओ इंस्टॉल‌ न होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सभी आंगनबाडी केन्द्रों का सर्वेक्षण कराकर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।

विनय कुमार लंगेह

कलेक्टर- महासमुंद।

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