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अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो

सीबीआई जांच पूरी होने तक राज्यपाल की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए –महिला कांग्रेस

महिला कांग्रेस ने कैंडल मार्च निकालकर अंकिता भंडारी को दी श्रद्धांजलि, न्याय की मांग को लेकर बुलंद की आवाज

जांजगीर-चांपा। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आज जिला मुख्यालय जांजगीर में महिला कांग्रेस द्वारा सुश्री मनोरमा पाटेकर के संयोजन विधायक ब्यास कश्यप, रमेश पैगवार,विवेक सिंह सिसोदिया,रफीक सिद्दीकी,राइस किंग खूंटे,नगर कांग्रेस अध्यक्ष रामविलास राठौर,पार्षद प्रिंस शर्मा की विशेष उपस्थिति में कैंडल मार्च निकाला गया। शहीद स्मारक से प्रारंभ होकर अंबेडकर प्रतिमा स्थल तक पहुंचे इस मार्च में अंकिता भंडारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की कि सीबीआई की जांच पूरी होने और मामले से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष जवाब सामने आने तक सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें संवैधानिक पद पर बनाए रखने के निर्णय को स्थगित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश के निकट एक रिसॉर्ट में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराया गया तथा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और पहचान को लेकर उठ रहे सवालों के कारण निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग लगातार जारी है। अंकिता के परिजनों ने इस संबंध में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम पर भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेता ने इन्हें खारिज किया है। जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने परिजनों की मांग पर मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर महिला कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। महिला कांग्रेस ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि देश की प्रत्येक बेटी की सुरक्षा, सम्मान और न्याय से जुड़ा सवाल है। जब किसी गंभीर अपराध में प्रभावशाली व्यक्तियों की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं, तो जांच एजेंसियों का दायित्व है कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के सच्चाई सामने लाएं। कानून की नजर में सभी समान हैं और किसी भी व्यक्ति को उसके पद या राजनीतिक प्रभाव के कारण विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। महिला कांग्रेस ने मांग की कि सीबीआई जांच समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए, कथित वीआईपी की पहचान एवं भूमिका स्पष्ट की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कैंडल मार्च के माध्यम से महिला कांग्रेस ने संकल्प व्यक्त किया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की आवाज लगातार बुलंद की जाती रहेगी। संगठन ने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यपाल की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए और सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें पद पर बनाए रखने के निर्णय को स्थगित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। महिला कांग्रेस ने कहा कि देश की बेटियों को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय मिलने और पूरे मामले की सच्चाई सामने आने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। इस दौरान प्रमुख रूप से पाषर्दगढ़ श्रीमती रेखा सोनवान,श्रीमती रक्षा धीरज सिंह बैस,जगदीश्वरी सूर्यवंशी, अरमान खान,रजनी सूर्यवंशी सत्यभामा टंडन, मुन्नी रात्रे ,चंपा प्रधान शशिकांता हंसेलिया,परमेश्वर निर्मले, नर्मदा सूर्यवंशी,युवा कांग्रेस नेता आकाश तिवारी, संस्कार राठौर,चंद्रप्रकाश ओग्रे भाकू,दुष्यंत यादव,अमन,सावन पाटेकर सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।

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