नियमित रोजगार और 100 फीसदी मुआवजे की मांग
कोरबा। मंगलम भवन हरदीबाजार में एसईसीएल दीपका खदान विस्तार से प्रभावित हरदीबाजार गांव के भूविस्थापितों की महापंचायत हुई। करीब तीन घंटे चली बैठक में ग्रामीणों ने एसईसीएल की नीतियों को अपने हित में नहीं बताते हुए जमीन अधिग्रहण के समय लागू प्रावधानों के आधार पर अधिकार देने की मांग उठाई।
भूविस्थापितों ने कहा कि वर्ष 2004 और 2010 में एसईसीएल ने हरदीबाजार की जमीन का अधिग्रहण किया था। उस समय लागू छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक खातेदार को रोजगार देने का प्रावधान था। ग्रामीणों ने इसी नीति के आधार पर एसईसीएल में नियमित रोजगार देने की मांग की। महापंचायत में बसाहट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि उत्तरदा के जयंती नगर में हरदीबाजार के विस्थापितों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने इस बसाहट स्थल को निरस्त कर सुपेतपारा बायपास के पास उतरदा की करीब 1340 एकड़ वन भूमि को हरदीबाजार के विस्थापितों के लिए बसाहट स्थल के रूप में चिन्हित करने की मांग रखी।
ग्रामीणों ने एसईसीएल द्वारा ड्रोन कैमरे के माध्यम से नए और पुराने मकानों का आकलन कर 40, 60 और 100 प्रतिशत के आधार पर मुआवजा तय करने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सभी मकानों का 100 प्रतिशत मुआवजा सोलसियम सहित दिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने कहा कि जब तक मुआवजा पत्रक और कटऑफ सूची सार्वजनिक नहीं की जाती तथा सुपेतपारा को हरदीबाजार के लिए बसाहट स्थल के रूप में चिन्हित नहीं किया जाता, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति एसईसीएल की गतिविधियों में सहयोग नहीं करेगा। उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट होकर संवैधानिक तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।



