छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा प्रदान करने के संबंध में निर्देश मिलने के बावजूद कोई फैसला न लेने पर स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को अवमानना का नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने विभागीय स्कूल शिक्षा सचिव से इस अवमानना नोटिस पर अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिका में उठाए गए मुख्य सांविधानिक बिंदु
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी से जुड़े बिलासपुर निवासी शीतल पाटनवर द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता शीतल पाटनवर ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर यह महत्वपूर्ण मांग की थी कि वर्ष 2008 में ही छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा का दर्जा प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त राज्य में नई शिक्षा नीति भी लागू हो चुकी है, जिसमें बच्चों को उनकी अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद 350 (क) भी प्राथमिक स्तर पर बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने का पूर्ण समर्थन करता है। इन सभी सांविधानिक एवं नीतिगत आधारों को लेकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को छत्तीसगढ़ी पढ़ाने के लिए निर्देशित किया था और तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का समय दिया था। किंतु सरकार की ओर से कोई कार्रवाई न होने से खफा होकर शीतल पाटनवर ने अवमानना याचिका दाखिल की।
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी से जुड़े बिलासपुर निवासी शीतल पाटनवर द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता शीतल पाटनवर ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर यह महत्वपूर्ण मांग की थी कि वर्ष 2008 में ही छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा का दर्जा प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त राज्य में नई शिक्षा नीति भी लागू हो चुकी है, जिसमें बच्चों को उनकी अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद 350 (क) भी प्राथमिक स्तर पर बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने का पूर्ण समर्थन करता है। इन सभी सांविधानिक एवं नीतिगत आधारों को लेकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को छत्तीसगढ़ी पढ़ाने के लिए निर्देशित किया था और तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का समय दिया था। किंतु सरकार की ओर से कोई कार्रवाई न होने से खफा होकर शीतल पाटनवर ने अवमानना याचिका दाखिल की।
मातृभाषा में शिक्षा और रोजगार की मांग
याचिकाकर्ता शीतल पाटनवर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी हमारी अपनी मातृभाषा है और इसमें शिक्षा तथा रोजगार का आवश्यक प्रावधान न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है। उन्होंने कहा कि आगामी 1 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस मनाया जाएगा, लेकिन अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के बिना यह राज्योत्सव कैसे मनाया जा सकता है? उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा कि 1 नवंबर को शासन यह आधिकारिक घोषणा करे कि राज्य के सभी स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सरकार ऐसी घोषणा करेगी, तभी राज्योत्सव का आयोजन वास्तविक अर्थों में सार्थक सिद्ध होगा और प्रदेश के 3 करोड़ छत्तीसगढ़िया नागरिक पूरे उत्साह और धूमधाम से राज्य का उत्सव मनाएंगे।
याचिकाकर्ता शीतल पाटनवर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी हमारी अपनी मातृभाषा है और इसमें शिक्षा तथा रोजगार का आवश्यक प्रावधान न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है। उन्होंने कहा कि आगामी 1 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस मनाया जाएगा, लेकिन अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के बिना यह राज्योत्सव कैसे मनाया जा सकता है? उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा कि 1 नवंबर को शासन यह आधिकारिक घोषणा करे कि राज्य के सभी स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सरकार ऐसी घोषणा करेगी, तभी राज्योत्सव का आयोजन वास्तविक अर्थों में सार्थक सिद्ध होगा और प्रदेश के 3 करोड़ छत्तीसगढ़िया नागरिक पूरे उत्साह और धूमधाम से राज्य का उत्सव मनाएंगे।



