कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, सात दिनों में ठोस पहल नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन
जांजगीर-चांपा। नगर की ऐतिहासिक पहचान और जीवनदायिनी धरोहर भीमा तालाब की बदहाल स्थिति को लेकर नगरवासियों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। तालाब में गंदगी, दुर्गंध और गंदे पानी के भराव से परेशान नागरिकों ने भीमा तालाब बचाओ समिति के संयोजन में कचहरी चौक से कलेक्टोरेट तक जनाक्रोश रैली निकालकर जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें बुलंद कीं। रैली में सैकड़ों की संख्या में नागरिकोंए समाजसेवियों, महिलाओं, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों ने शामिल होकर तालाब के संरक्षण और संवर्धन के लिए एकजुटता प्रदर्शित की। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर भीमा तालाब के समुचित सौंदर्यीकरण के लिए डीएमएफ मद से एक करोड़ रुपये आवंटित करने, तालाब में गंदे पानी के भराव पर रोक लगाने, जलनिकासी की उचित व्यवस्था करने तथा व्यापक सफाई सहित आवश्यक कार्य तत्काल प्रारंभ करने की मांग की। समिति ने प्रशासन को सात दिनों के भीतर ठोस पहल करने का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि मांगों की अनदेखी होने पर नगरवासी पुनः उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
भीमा तालाब केवल जलस्रोत नहीं, जांजगीर की पहचान और नगरवासियों की भावनाओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर है। समिति के सदस्यों ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस तालाब से नगर की पहचान जुड़ी है, आज वही गंदगी और दुर्गंध से घिरा हुआ है। तालाब के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्व में करोड़ों रुपये खर्च कर विकास कार्य किए जाने के बावजूद उचित रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। यह तालाब नगरवासियों के लिए महज पानी का एक स्रोत नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी स्मृतियों, परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। यही कारण है कि नगरवासी समय.समय पर श्रमदान के माध्यम से इसे स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहे हैं। इसके बावजूद यदि तालाब की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो यह स्थानीय निकाय और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली तथा नियमित निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि ऐतिहासिक धरोहर बदहाल हैए तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। समिति ने कहा कि विकास का अर्थ केवल निर्माण कार्य कराना और राशि खर्च करना नहींए बल्कि निर्मित संपत्तियों का संरक्षणए नियमित रखरखाव और उनके उद्देश्यपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करना भी है। भीमा तालाब पर खर्च की गई राशि तभी सार्थक मानी जाएगी, जब तालाब स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित स्थिति में दिखाई दे। तालाब में गंदे पानी की आवक रोकनेए जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बनाने, जमा गंदगी की सफाई कराने और नियमित देखरेख सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना आवश्यक है। केवल अस्थायी सफाई या दिखावटी सौंदर्यीकरण से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। समिति ने मांग की कि संबंधित विभागों की जिम्मेदारी निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से कार्य कराया जाएए ताकि भविष्य में नगर की इस ऐतिहासिक धरोहर को फिर से बदहाली का सामना न करना पड़े। जनाक्रोश रैली में विधायक ब्यास कश्यप सहित जनप्रतिनिधियोंए सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगरवासियों ने दिखाई एकजुटता-भीमा तालाब बचाओ समिति के सदस्य प्रिंस शर्मा, विष्णु यादव, धीरज सिंह बैस, देवराज सिंह चंदेल यादव, भोलू मितेश यादव, राजा सिद्दीकी, चंद्रकुमार ओग्रे, मोगली मिश्रा, गज्जू साहू एवं बजरंग कहरा धर्मेंद्र यादव दुष्यंत यादव, संस्कार राठौर, सत्ता राठौर, राजा खान, हेमलता राठौर, भगवांतीं यादव, सौरभ सिंह आकाश तिवारी के संयोजन में निकाली गई रैली में विधायक ब्यास कश्यप, दिनेश शर्मा, रमेश पैगवार, विवेक सिंह सिसोदिया, रफीक सिद्दीकी, पार्षद अरमान खान, श्रीमती रेखा सोनवान, रक्षा सिंह बैस, विजय बंटी अग्रवाल, अक्षय टेकाम, श्रीमती हेमलता राठौर, पूनम अग्रवाल, पूनम सारथी, सत्यभामा ठण्डन एंव पूरी टीम रजनी सूर्यवंशी एवं सत्यभामा टंडन मिथुन राठौर लक्ष्मी लदेर सोनू निर्मलकर हरीश धीवर आनंद राठौर सोनू राठौर, गोपाल राठौर, अजय नामदेव, कुलदीप सिंह, मोनू सिंह, विशाल साहू प्रियांक यादव, रणविजय यादव, देवेश कटकवार, चींचीं यादव, राजकुमार सारथी, प्रिंस यादव, अतुल यादव, अंकित राठौर, करन सिंह प्रभात गढ़वाल पुष्पा मोनू राठौर मनोज वस्त्रकार मनीष गोयल संजू देवांगनए सहित अनेक नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि भीमा तालाब का संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संगठन का विषय नहीं, बल्कि पूरे नगर के सम्मानए पर्यावरण और सार्वजनिक हित से जुड़ा मुद्दा है। ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा करना प्रशासन के साथ.साथ समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।



