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लच्छीबंध तालाब अपने अस्तित्व को बचाने प्रशासन से लगा रहा गुहार

स्थगन आदेश के बाद भी अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद, एसडीएम के आदेश की हो रही अवहेलना

चांपा (संवाद साधना) । नगर के प्राचीन धरोहर के रूप में अपनी पहचान रखने वाला लच्छीबंध तालाब इन दिनो तालाब को पाटकर निर्माण करने वालों से परेशान है। लगातार तालाब को पाटकर व्यवसाय प्रतिष्ठान खड़ा करने वाले में चांपा एसडीएम के स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण कार्य करना बंद नही किया है इससे ऐसा प्रतीत होता है कि इन लोगों में शासन प्रशासन का भय समाप्त हो गया है ये एसडीएम जैसे पद के अधिकारी को अपनी जेब में लेकर घूमते हैं। जहां पर नगर के मध्य थाना से थोड़ी ही दूर स्थित तालाब जो की जमीदारों के द्वारा जनहित में खुदवाया गया प्राचीन तालाब है इस तालाब पर निजी तालाब के नाम पर लोगों के व्यावसायिक उपयोग की लालच बढ़ गई है। इसके चलते तालाब को पाटकर उसमें क्रमशः 14 की संख्या में दुकानों का निर्माण कर लिया गया है। लगातार शिकायत के बाद भी प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए एक के बाद एक दुकान बनती गई लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नही हो पाया है इससे तालाब पर अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद है। इस संबंध में नगर के समाजसेवियो ने सामूहिक रूप से चांपा के अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष प्रकरण दर्ज कराया है जिस पर तत्काल अनुविभागीय अधिकारी द्वारा निर्माण कार्य पर स्थगन लगा दिया गया है और तालाब पाटकर निर्माण करने वालों को नोटिस तामिल कर दी गई है। लेकिन इसके बाद भी उक्त स्थल पर निर्माण कार्य बंद नही किया गया है बल्कि और तेज गति से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है चांपा नगर के बीच हो रहे हैं गोरख धंधों को खुली आंखों से शासन प्रशासन और नगर पालिका के जनप्रतिनिधि देख रहे हैं लेकिन सब की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है मुंह में दही जमा हुआ है मंचों पर बड़े-बड़े भाषण करने वाले नेता शांत है वही यह तालाब अपनी बदहाली के लिए आंसू बहा रहा है। नगर के शुभचिंतक सरोवर की सुंदरता और जल स्तर को बिगाड़ने वाले अन्याय के विरुद्ध अपना सर उठा रहे हैं लेकिन उसके बाद भी प्रशासन की नाकामी या कहे उदासीनता के चलते अवैध निर्माण कार्य करने वालों पर कढ़ाई नही हो पा रही है। इस संबंध में अब प्रशासन ही बता पाएगा कि उनके आदेश की अवहेलना करने वालों पर किस तरह से वह कार्रवाई करने जा रही है।  इतना जरूर है चांपा की आमजनता की नजर इस तालाब पर है। लोग इंतजार कर रहे है कि उसके अस्तित्व को बहाल करने के लिए प्रशासन किस तरह से अपनी पहल कर पता है या फिर यह तालाब एक दिन पाटकर जमीन का रूप ले लेगा यह गंभीर सोच का विषय है।

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