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Raipur News: अनुगूंज ने बिखेरी बाल शास्त्रीय संगीत की स्वर्णिम छटा, बाल कलाकारों ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध

Raipur News: संगीत संध्या ने शहर को शास्त्रीय संगीत के मधुर स्वरों से सराबोर कर दिया

Raipur News: रायपुर, बाल दिवस की पूर्व संध्या पर रजवाड़ा हॉल सिविल लाइन रायपुर में कार्यक्रम आयोजित किय गया। आयोजित कमल सिंह भंडारी स्मृति संगीत संध्या के अंतर्गत अनुगूंज बाल शास्त्रीय संगीत संध्या ने शहर को शास्त्रीय संगीत के मधुर स्वरों से सराबोर कर दिया। मंजूषा बेडेकर की उत्कृष्ट परिकल्पना और निर्देशन में यह संध्या सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति और कला के प्रति समर्पित अगली पीढ़ी के लिए एक भव्य उत्सव बन गई। मुख्य अतिथि वीणा सिंह ने सभी बाल कलाकारों को मोमेंटो प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया कार्यक्रम का शुभारंभ उन हृदयस्पर्शी पंक्तियों से हुआ, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का आगाज एक मनमोहक बालगीत मैंने रंगों का डिब्बा जो खोला था से हुआ, जिसे निवांश, अवान्या, दिव्यांना, आर्यव, विदुषी और लहर ने प्रस्तुत कर मंच पर जीवंतता भर दी। इसके पश्चात, एक के बाद एक बाल कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की गहन प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिव्याना अग्रवाल ने राग भूपाली में छोटा खय़ाल विधाता तुम्हीं ने संवारा प्रस्तुत कर अपनी स्पष्ट स्वर साधना और मधुर गायकी से सभी का मन मोह लिया। लहर नीहचलानी ने राग खमाज में एक ताल की पारंपरिक रचना खेलो नंदलाल गाकर बाल सुलभ उल्लास और शास्त्रीय गंभीरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिससे पूरा हॉल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। अंशी राजवैद्य ने राग बिहाग में ले जा रे जा रे पथिकवा गाकर अपनी निपुणता और राग पर पकड़ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसके बाद विदुषी सिंह एवं आर्यव अग्रवाल ने पंडित रामाश्रय झा जी की प्रसिद्ध रागमाला रचना गुनी गाये संधि प्रकाश राग तीन ताल में प्रस्तुत की। 10 रागों के सुंदर संगम से सजी यह प्रस्तुति बाल कलाकारों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी, किंतु दोनों ने इसे पूर्णता के साथ निभाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

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Raipur News:  राग बागेश्री में बलमा मोरी तोरे संग व तराना तीन ताल में गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया

संध्या के सबसे नन्हे कलाकार आर्यव अग्रवाल ने राग यमन में गुरु बिना कैसे गुन गाऊँ गाकर सभी का हृदय जीत लिया। उनकी तानों की स्पष्टता और संगीत की गहरी समझ दर्शनीय रही। मायरा मोहता ने राग बागेश्री में बलमा मोरी तोरे संग व तराना तीन ताल में गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भाव और तकनीक का अद्भुत संतुलन था। एक और मनोहारी बालगीत आओ आओ आओ, गुन गुन के बाद, विदुषी सिंह ने राग यमन में डॉ. अनीता सेन की रचना मोरा जिया तरसे को एक ताल में प्रस्तुत किया तथा तत्पश्चात उसी राग का तराना गाकर अपनी परिपक्व गायकी का परिचय दिया।

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Raipur News:  प्रस्तुति का समापन उन्होंने सरगम और तराने से किया

प्रस्तुति का समापन उन्होंने सरगम और तराने से किया, जो संध्या का एक उच्च संगीतात्मक शिखर रहा। रूपक बेडेकर ने राग दरबारी कानड़ा में गीता को रचे कन्हैया (डॉ. अरुण कुमार सेन की रचना) तीन ताल में गाकर दर्शकों को प्रभावित किया। इसके साथ ही, उसी राग पर आधारित गीत संगीत ही देह प्राण, संगीत ही आत्मा उनकी प्रस्तुति का उत्कर्ष बिंदु रहा, जिसने संगीत की दिव्यता को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में, बच्चों ने समूह स्वर में डॉ. अनीता सेन की रचना कौन कहां से आए जी, आलू मिर्ची चाय जी को एक मनोरंजक विज्ञान गीत के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से भरपूर सराहा।

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