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भाजपा नेता के फार्म हाउस में अफीम की खेती पर कांग्रेस का हमला, गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग

दुर्ग के समोदा में 10 एकड़ में अफीम खेती का मामला, कांग्रेस ने कहा– सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं

महासमुंद ( संवाद साधना)। दुर्ग जिले के समोदा गांव में एक भाजपा नेता के फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सूखे नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर कांग्रेस अब आक्रामक रुख में नजर आ रही है। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी महासमुंद ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने बताया कि दुर्ग के समोदा गांव में एक फार्म हाउस के अंदर करीब 10 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी। यह खेती स्थानीय भाजपा नेता विनायक ताम्रकार द्वारा कराई जा रही थी। उन्होंने बताया कि ताम्रकार भाजपा के दुर्ग जिले के किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा के राइस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प के प्रदेश संयोजक हैं।

यादव ने आरोप लगाया कि ताम्रकार भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी हैं। उनकी तस्वीरें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल सहित भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं अजय जामवाल और शिवप्रकाश के साथ सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा द्वारा की गई निलंबन की कार्रवाई केवल दिखावा है। बिना सरकारी संरक्षण के खुलेआम इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती होना संभव नहीं है। उन्होंने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री से तत्काल इस्तीफे की मांग की। यादव ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है और राज्य अब इस मामले में पंजाब, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहरों के आउटर कैफे युवाओं को नशा परोसने के अड्डे बन चुके हैं।

मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए – द्वारिकाधीश

महासमुंद शहर में ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और पुलिस कार्रवाई नहीं होने के सवाल पर यादव ने कहा कि पुलिस सत्ताधीशों के दबाव में मजबूर हो गई है। नशे के कारोबार को रोकने की बजाय उसे अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस की मिलीभगत के कारण प्रदेश के युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में नशे के कारोबार को रोकना चाहती है तो इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और संरक्षण देने वाले लोगों का भी खुलासा किया जाना चाहिए।

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