नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही धूमधाम और गर्व के साथ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण करने के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अगले पांच से सात साल का लक्ष्य बताया और बीते 12 साल के कामकाज का हिसाब दिया। पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन के दौरान कौन-कौन सी बड़ी बातें कहीं, आइए जानते हैं…
विकसित भारत बनाना बड़ा सपना- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा, ” भारत का एक बड़ा सपना है- 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाना। इस सपने को पूरा करने की ताकत और संकल्प 140 करोड़ भारतीयों से मिल रहा है। जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश खुद को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य तय करता है, तो इससे पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश जाता है। भारत के इस लक्ष्य से दुनिया की नजर में भारत की छवि बदल रही है और दुनिया भारत को नए तरीके से देख रही है।
पीएम मोदी ने रखा अगले पांच साल का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भारत के विकास और आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ (ऊर्जा की सात धाराओं) का आह्वान किया। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति-शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी, और भारत की सॉफ्ट पावर को इन सात शक्तियों के रूप में रेखांकित किया।
पीएम ने हरित हाइड्रोजन, अक्षय ऊर्जा और ओशन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया। अगले 5 वर्षों के लक्ष्य और 12 वर्षों का हिसाब प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि ये धाराएं भारत को विकसित राष्ट्र बनाएंगी।
पीएम ने कहा कि भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में अपना सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया है। 3 प्लांट शुरू हो गए हैं। आने वाले 7-8 साल में और प्लांट शुरू होने वाले हैं।
जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए, वह 5-7 साल में पूरे हुए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, हमारे सीफूड की दुनिया में आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। हमारी सी बेल्ट इस क्षेत्र में काफी काम आ सकती है। मैंने जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य एक मजबूत नींव पर खड़ा है। हमने पिछले 10-12 साल में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है, यह आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा है।
इसका एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अब हमें लक्ष्य प्राप्त करके रहना है। हमें अपनी संस्कृति, सोच और काम की गति को बदलना होगा। जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए हैं, वह काम हमें करने में हमें 5-7 साल लगे हैं। मुझे भरोसा है कि हम इस सपने को साकार कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने 12 साल का दिया हिसाब
पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में देश के हर वर्ग- दलित, आदिवासी, गरीब व मध्यम वर्ग के योगदान की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि ये सभी देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए अटूट संकल्प और समर्पण के साथ हर संभव प्रयास किया है, मैं इन प्रयासों का सम्मानपूर्वक सम्मान करता हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी टेक्नोलॉजी क्रिटिकल मिनिरल्स पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपने आप को सुरक्षित करने में जुटा है। क्रिटिकल मिनिरल्स कॉरिडोर की घोषणा हो चुकी है। कई देशों के साथ एग्रीमेंट हो रहा है।
आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी
पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के कुछ देश पेट्रोल, डीजल, खाद (फर्टिलाइजर), दवाइयों और टेक्नोलॉजिकल चिप्स जैसे जरूरी संसाधनों को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी है।
इसीलिए, पिछले कुछ सालों से हमारा यह पक्का इरादा रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, हमें आत्मनिर्भर बनना होगा… हमें अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी और अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी।
इसी संकल्प के साथ, हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। हर भारतीय ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्वदेशी’ और ‘लोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों से जुड़ रहा है।”
देश को दिमागी नक्सलियों से बचाएं
राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी समाज में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं और ऐसे तत्वों को पहचानना जरूरी है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा पीढ़ी को सकारात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना होगा। उन्होंने युवाओं से हिंसा और अराजकता के रास्ते से दूर रहकर विकास, एकता और रचनात्मक कार्यों में योगदान देने की अपील की।
कच्चे तेल पर निर्भरता गलत सोच का नतीजा
देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ” किसी देश की तरक्की अक्सर संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि उसकी सोच की सीमाओं से रुकती है। जब सोच ठहर जाती है और दायरे में सिमट जाती है, तो हम अपनी असली क्षमता को नहीं पहचान पाते। आज भी देश कच्चे तेल के लिए दूसरों पर निर्भर है और यह स्थिति एक गलत सोच का नतीजा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी सोच की वजह से हमारे समुद्र तट का 99% हिस्सा ‘नो-गो एरिया’ (जहाँ जाने की मनाही हो) घोषित कर दिया गया था।
यह सोच की गरीबी थी। हमने तय किया कि ऐसा नहीं चल सकता। हमने उस 99% हिस्से को, जो कभी ‘नो-गो जोन’ हुआ करता था, अब ‘गो-अहेड जोन’ (जहां जाने की इजाजत हो) बना दिया है। अब हम समुद्र की गहराई में खोज करने और नए भंडार ढूंढने के काम में तेजी से जुटे हैं।”



