जनरल स्टोर्स एवं ब्यूटी पार्लर में लगी रही महिलाओं की भीड़
जांजगीर-चांपा। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना को लेकर आज तीजा पर निर्जला उपवास शुरु कर दी है। रात में नदी या तालाब के किनारे मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधि विधान से पूजा अर्चना करेंगी तथा रातभर भजन-कीर्तन करेंगी। दूसरे दिन सुबह स्नान कर व्रत तोड़ेंगी। पर्व को लेकर सुहागिनों में खासा उत्साह है। साल में एक बार आने वाला त्यौहार तीजा का इंतजार हर महिला को होता है। तीजा पर्व को लेकर रविवार को बाजार गुलजार रहा। सोमवार को भी सुबह जनरल स्टोर्स, कपड़ा दुकान एवं ब्यूटी पार्लर में महिलाओं की भीड़ लगी रही। भाद्र मास शुक्ल पक्ष के तृतिया तिथि को मां पार्वती जगतजननी की सौभाग्यदायक हरितालिका तीज का महापर्व मनाया जाता है। तीजा को लेकर सुहागिनें महिलाएं सोमवार 14 सितंबर को 24 घंटे का निर्जला व्रत शुरु कर दी है। सुहागन महिलाओं द्वारा इस दिन निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। अंचल में तीजा महिलाओं का बड़ा पर्व है। इसको लेकर सप्ताह दिन पहले ही घर-घर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों में ठेठरी, खुर्मी व विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने के साथ अन्य तैयारियों में महिलाएं जुटी रही, वहीं सोमवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखकर रात में नदी या तालाब के किनारे मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधिविधान से पूजा अर्चना करेंगी तथा रतजगा का भजन-कीर्तन करेंगी। दूसरे दिन सुबह स्नान कर व्रत तोड़ेंगी। पर्व को लेकर सुहागिनों में खासा उत्साह है। युवतियों में भी इस पर्व को लेकर काफी उत्साहित है। इधर तीजा पर्व पर खरीददारी को लेकर लोगों की भीड़ बाजारों में दिखी। दुकानों में दिनभर चहलपहल दिखी। पं किरण कुमार मिश्रा हनुमान मंदिर पुजारी ने बताया कि इस व्रत में महिलायें भगवान शिव पार्वती की रेत मिटृी की मूर्तियां बनाकर पूजन कर सुखी वैवाहिक जीवन तथा अपने पति के दीर्धायू होने एवं संतान प्राप्ति के लिये प्रार्थना करती है। कुवारी कन्याओं सुयोग्य वर प्राप्ति के लिये यह व्रत करती है। इस व्रत को करने से कुवारी कन्याऔं को मनचाहा वर की प्राप्ति होती है। हरितालिका तीज की उत्पत्ति एवं इसके नाम का महत्व, हरितालिका शब्द, हरत -आलिका से मिल कर बनी है। जिसका अर्थ अपहरण व स्त्रीमित्र,सहेली होता है। कथानुसार पार्वती की सहेली उनका अपहरण कर उन्हें घने जगल में लें गई थी ताकि उनके पिता पार्वती के इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह विष्णुजी से न कर दे। पार्वती शिवजी को वरण कर चुकी थी। पार्वती ने हरितालिका पूजन को कठोर तप कर भूखी प्यासी रहकर व्रत को किया, जिससे शिव जी को अपने पति रुप में प्राप्त किया सखी वन में हर के ले गई थी इस कारण इस व्रत का नाम हरितालिका पड़ा।



