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17 सितंबर को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा विश्वकर्मा जयंती

चांपा। देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती एवं विश्वकर्मा पूजा पर्व को लेकर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर कारीगरों, तकनीकी कर्मचारियों, व्यापारियों, उद्योगों, वर्कशॉप संचालकों तथा विभिन्न प्रतिष्ठानों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, कारोबार में उन्नति और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तु एवं निर्माण कला का अधिष्ठाता माना जाता है। उन्होंने अपनी अद्भुत शिल्पकला और वास्तु ज्ञान से अनेक दिव्य भवनों, नगरों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया। इसी कारण निर्माण, शिल्प, मशीनरी और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर दुकानों, कारखानों, वर्कशॉप, गैरेज, निर्माण स्थलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले औजारों, मशीनों एवं उपकरणों की साफ-सफाई कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। कई प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा, हवन एवं आरती का आयोजन किया जाता है। कारीगर और तकनीकी कार्य से जुड़े लोग अपने औजारों को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मानते हुए उनकी पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा व्यवसाय और रोजगार में उन्नति होती है। विश्वकर्मा पूजा को लेकर प्रतिमा, सजावटी सामग्री, फूल-माला, पूजन सामग्री और अन्य सामानों की मांग बढ़ने लगी है। वर्कशॉप एवं दुकानों में साफ-सफाई और सजावट का काम भी शुरू हो गया है। औद्योगिक एवं तकनीकी संस्थानों में भी पूजा की तैयारियां की जा रही हैं विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि श्रम, कौशल, तकनीक और सृजनशीलता के सम्मान का पर्व भी माना जाता है। यह पर्व मेहनतकश लोगों को अपने कार्य के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।भगवान विश्वकर्मा की पूजा हमें यह संदेश देती है कि किसी भी निर्माण और विकास के पीछे श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मेहनत महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक दौर में मशीनों और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में विश्वकर्मा पूजा श्रम और हुनर के सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आती है।

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