राजनांदगांव की चलित झांकियां बनीं आकर्षण
जांजगीर-चांपा। आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम के रूप में अकलतरा का श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव वर्षों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। रेलवे स्टेशन के सामने आयोजित इस दुर्गोत्सव की शुरुआत वर्ष 1958 में हुई थी। लगभग 68 वर्षों से निरंतर चली आ रही यह परंपरा आज नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बंगाल की पारंपरिक दुर्गा पूजा पद्धति और कोलकाता के दुर्गोत्सव की झलक प्रस्तुत करने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर में रेलवे परिक्षेत्र में बंगाली समाज के लोगों द्वारा शुरू की गई मां दुर्गा की आराधना की यह परंपरा समय के साथ व्यापक सामाजिक सहभागिता का स्वरूप ले चुकी है। आज विभिन्न समाजों के लोग उत्साहपूर्वक इसमें शामिल होकर धार्मिक आस्था, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता की मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव समिति के पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। बंगाल की परंपरा के अनुरूप आयोजित होने वाली महाष्टमी की संधि पूजा इस उत्सव की प्रमुख विशेषता है। इसके साथ पारंपरिक पूजन सामग्री, 108 दीपों का महत्व, प्रतीकात्मक बलि तथा विजयादशमी पर सिंदूरदान जैसे अनुष्ठान आयोजन को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करते हैं।
दुर्गोत्सव को आकर्षक और यादगार बनाने के लिए समिति द्वारा राजनांदगांव से चलित झांकियां मंगाई गई हैं। 17 से 20 अक्टूबर तक इनका प्रदर्शन किया जा रहा है। धार्मिक प्रसंगों और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित ये झांकियां श्रद्धालुओं, बच्चों और युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। 16 अक्टूबर को प्रतिमा स्थापना के साथ प्रारंभ हुए महोत्सव में 17 अक्टूबर को सप्तमी की विशेष पूजा, 18 अक्टूबर को महाष्टमी की संधि पूजा, 19 अक्टूबर को नवमी का हवन-पूजन हुआ तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर सिंदूरदान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। अकलतरा का यह दुर्गोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक सहभागिता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। लगभग सात दशकों की यात्रा में इस आयोजन ने अनेक पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़े रखा है। विभिन्न समाजों की सहभागिता ने इसे सर्वसमाज के उत्सव का स्वरूप प्रदान किया है।



