जांजगीर-चांपा। रेलवे में बड़े अधिकारी के हाथों किसी महत्वपूर्ण कार्य का उद्घाटन होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन चांपा में नवीनीकृत बाल उद्यान के उद्घाटन का दृश्य उस समय भावुक और यादगार बन गया, जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने स्वयं फीता काटने के बजाय वहां मौजूद एक रेल्वे कर्मचारी को बुलाकर उद्घाटन करने का अवसर दिया। महाप्रबंधक के इस अप्रत्याशित कदम ने वहां मौजूद रेल कर्मचारियों और मजदूरों के बीच खुशी के साथ साथ सम्मान की भावना भर दी। नवीनीकृत बाल उद्यान चांपा के उद्घाटन के लिए बिलासपुर से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी महाप्रबंधक तरूण प्रकाश, प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी डॉ. दर्शनीता बी. अहलुवालिया, मंडल रेल प्रबंधक राकेश रंजन आदि पहुंचे थे। चांपा के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में रेलकर्मी भी मौके पर उपस्थित थे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी थीं और सभी की निगाहें महाप्रबंधक तरुण प्रकाश की ओर थीं। इसी बीच महाप्रबंधक ने वहां उपस्थित मजदूर कर्मचारियों के बीच से एक व्यक्ति को बुलाया। उन्होंने उसका नाम और परिचय पूछा। सामने आए मजदूर ने अपना नाम जय प्रकाश यादव बताया और स्वयं को ब्रांच सेक्रेटरी, मजदूर कांग्रेस के रूप में परिचित कराया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे कार्यक्रम का माहौल ही बदल दिया।
महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने जय प्रकाश यादव से कहा कि वे फीता काटकर नवीनीकृत बाल उद्यान का उद्घाटन करें। अचानक मिले इस सम्मान से जय प्रकाश यादव कुछ क्षण के लिए झिझक गए। उन्होंने विनम्रता से कहा— सर, आपको उद्घाटन करना है।जिस पर महाप्रबंधक ने उन्हें दोबारा कहा कि मैं कह रहा हूं, आप फीता काटकर इसका उद्घाटन करो। महाप्रबंधक के इस आत्मीय आग्रह के बाद जय प्रकाश यादव ने कांपते हाथों से कैंची संभाली और रिबन काट दिया। जैसे ही रिबन कटा, वहां मौजूद रेल मजदूरों और कर्मचारियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देने लगी। जय प्रकाश यादव के लिए यह महज फीता काटने का अवसर नहीं था। यह उस मेहनतकश वर्ग के लिए सम्मान का क्षण था, जिसके श्रम से रेलवे की व्यवस्थाएं निरंतर चलती हैं। मौके पर मौजूद रेलकर्मियों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया कि जिस हाथ में रोज मेहनत के औजार रहते हैं, उसी हाथ को आज उद्घाटन की कैंची थमाई गई। महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के इस सहज और अप्रत्याशित फैसले ने कार्यक्रम को औपचारिकता से निकालकर भावनात्मक बना दिया। वहां मौजूद मजदूर-कर्मचारियों में उत्साह की लहर दौड़ गई और लंबे समय तक इस क्षण की चर्चा होती रही। यह उद्घाटन केवल एक बाल उद्यान के नवीनीकरण का उद्घाटन नहीं रहा, बल्कि मेहनतकश हाथों के सम्मान का ऐसा दृश्य बन गया, जिसे वहां मौजूद रेलकर्मी लंबे समय तक याद रखेंगे।



