जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर के हाईस्कूल मैदान में आगामी 25 सितंबर से 8 अक्टूबर तक रासेश्वरी देवी के सानिध्य में ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन एवं आध्यात्मिक साधना कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों में उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम को व्यापक रूप देने के लिए शिक्षकगण, संगठन पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजनों की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें आयोजन की तैयारियों, प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की सहभागिता को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘उपनिषद ज्ञानामृत एवं रूपध्यान साधना’है, जिसमें रासेश्वरी देवी के श्रीमुख से आध्यात्मिक एवं ज्ञानपरक प्रवचन होंगे। उपनिषदों में निहित आध्यात्मिक विचारों, जीवन मूल्यों और आत्मचिंतन के विषयों को सरल रूप में लोगों तक पहुंचाने पर केंद्रित इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस आयोजन की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में उपनिषदों के महत्व और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में उनके स्थान पर चर्चा की गई। आयोजकों की ओर से कहा गया कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि रासेश्वरी देवी के आधिकारिक मंच पर भी उनके कार्यक्रमों को आध्यात्मिक प्रवचन, साधना, भक्ति और जीवन के आध्यात्मिक उद्देश्य से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है। वर्ष 2026 में ही उनके नेतृत्व में उपनिषद आधारित कार्यक्रम ओडिशा और अन्य स्थानों पर भी आयोजित किए गए हैं। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, आगामी दिनों में बाल संस्कार शिविर आयोजित किए जाने की भी योजना है। इसमें बच्चों को योग, ध्यान, संस्कार और जीवन मूल्यों से संबंधित गतिविधियों से जोड़ने की बात कही गई है। आयोजकों का मानना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी जरूरी है। आयोजन की तैयारी को लेकर हुई बैठक में बाल संरक्षण आयोग छत्तीसगढ़ के सदस्य मन्मथ नाथ शर्मा, अरुण तिवारी, अनुभव तिवारी, विक्रान्त साहू, बीएमएस महामंत्री संजय चैहान, राघवेन्द्र शर्मा, शिवम, दिनेश, यशपाल चैबे, राहुल भार्गव, राजू जगत सहित कई शिक्षक, विभिन्न संगठन के पदाधिकारी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। बैठक में आयोजन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ केवल प्रवचन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, ध्यान, साधना और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। रासेश्वरी देवी के प्रवचनों में उपनिषदों के गूढ़ आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में समझाने पर विशेष जोर रहता है। उनके आधिकारिक कार्यक्रम विवरण में भी उपनिषदों के ज्ञान, भक्ति, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक चिंतन को प्रमुख विषयों के रूप में बताया गया है।



