
चांपा(संवाद साधना)। कलेक्टर जन्मेजय मोहबे द्वारा 19 मार्च को चांपा नगर का निरीक्षण किया गया था जिसमें कलेक्टर ने शहर को साफ सुथरा रखने के कड़े निर्देश दिए थे। साथ ही कलेक्टर ने नगर के रामबांध तालाब की साफ सफाई, जलकुंभी हटाने नगर पालिका को जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नगर पालिका प्रशासन ने इसका वैकल्पिक रास्ता निकाला है रामबांधा तालाब से जलकुंभी हटाने के बजाय उसको बास के सहारे तालाब के अंदर ही धकेल दिया है। जिससे अब इस तालाब में निस्तार करने वाले लोगों को थोड़ी सहूलियत तो मिली है। लेकिन यह इसका वैकल्पिक रास्ता नही है। आप लोगों ने तीर्थ स्थलों के नदी, सरोवरों मे बने घाटों पर लोहे की जंजीरों या बांसों और रस्सियों को देखा होगा यह व्यवस्था लोगों को गहरे पानी मे जाने से रोकने के लिए किया जाता है। ठीक इसी तरह की व्यवस्था इन दिनों नगर के रामबांधा तालाब पर नगर पालिका द्वारा की गई है लेकिन यह व्यवस्था लोगों को गहरे पानी मे जाने से रोकने के लिए नही बल्कि जलकुंभी को घाटों पर आने से रोकने के लिए बांसों का घेरा बनाई गई है। दरअसल पिछले कई महीनों से रामबांधा तालाब जलकुंभी से सुशोभित है। और हवा चलने के साथ ही जलकुंभी घाटों पर आ जाते हैं जिससे नहाने वाले लोगों को तकलीफ महसूस होती है। रामबांधा तालाब से जलकुंभी को हटाना नगर पालिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि इससे पालिका को आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। इसलिए घाटों मे निस्तारण के लिए यह व्यवस्था कर पालिका ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। इस वैकल्पिक व्यवस्था से राहत उन लोगों को मिल रही है जो गांवों से अस्पतालों मे अपने परिजनों के इलाज कराने के लिए आते हैं। ज्ञात हो कि चांपा नगर में अनेक डॉक्टरों की निजी क्लीनिक संचालित है और लायंस चौक से लेकर गौरव पथ मार्ग तक दर्जन भर से अधिक अस्पताल मौजूद है। जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज प्रतिदिन अनेकों बीमारियों का उपचार कराने पहुंचते है और इन अस्पतालों मे मरीजों के साथ उनके परिजनों का आना जाना और रात बिताना होता है इसके अलावा चौपाटी के पास घाट मे मृतकों के दशकर्म कार्य और नहावन का कार्यक्रम भी चलता रहता है। इससे आमजनों को तालाब में कोई राहत नही मिली बल्कि लोगों में चर्चा है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों को नगर पालिका के जिम्मेदारों ने हल्के में लेकर धज्जियां उड़ा दी।



