Latest Posts

बिना पुस्तकों के स्कूल पहुंच रहे अधिकांश बच्चे

सर्वर डाउन, एक पाठ्यपुस्तक में दो बार कोड और कई में बार कोड की प्रिंटिंग सही न होने से वितरण में बाधा

महासमुंद। नए शिक्षा सत्र के 16 दिन बीत गए। इन 16 दिनों में जिले की सरकारी स्कूलों को मांग के अनुरूप पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई है । जो पाठ्यपुस्तकें मिली हैं उनके बारकोड की स्कैनिंग  न होने से वितरित नहीं हो पाई है। जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।बता दें पिछले साल सरकारी किताबों के कबाड़ खाने में मिलने के बाद इस नए सत्र से शासन ने हर सरकारी किताब में एक बारकोड लगाकर भेजा है। वितरण से पहले इन बारकोड को एक ऐप के जरिए स्कैन करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन सर्वर डाउन, एक पाठ्यपुस्तक में दो बार कोड और कई पाठ्यपुस्तकों में बार कोड की प्रिंटिंग सही न होने की वजह से बारकोड स्कैन करने में दिक्कत हो रही है। नया शिक्षण सत्र शुरू हुए पखवाड़ेभर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्कैनिंग का काम पूरा नहीं हो पाया है। इधर, बारकोड स्कैन किए बिना किताबों के वितरण पर रोक है। ऐसे में स्कैनिंग का काम पूरा होने के बाद ही इसका वितरण हो पाएगा। शिक्षकों ने भी अपने स्तर पर पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग में आ रही समस्या के विषय में विभाग में शिकायत की है।, लेकिन अब तक इसमें कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। इधर, किताबों के स्कैन न होने से वितरण का काम भी अटका हुआ है। 16 दिनों बाद भी बच्चे बगैर किताबों के स्कूल पहुंच रहे हैं।

*पौने तीन लाख किताबों की हुई स्कैनिंग, नहीं मिलीं पूरी किताबें*

मिली जानकारी के अनुसार 1 जुलाई की स्थिति में जिले में पहली से आठवीं तक 2 लाख 13 हजार 950 और 9 वीं से 10 वीं तक की 1 लाख 68 हजार 14 पाठ्यपुस्तकें प्राप्त हुई है। जिसमें से 2 लाख 74 हजार 275 पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग (71.8 प्रतिशत) हो पाई है और अभी भी 1 लाख 7 हजार 689 स्कैनिंग के लिए शेष है। इन स्कैनिंग हुई पाठ्यपुस्तकों में से 1 लाख 49 हजार 49 वितरित हो पाई है। इधर, जिला शिक्षा विभाग की मांग के अनुरूप भी पाठ्यपुस्तक उपलब्ध नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार जिले में पहली से आठवीं तक लगभग 9 लाख पाठ्यपुस्तकों की जरूरत है जिसके एवज में अभी 2 लाख 13 हजार 950 और 9वीं व 10वीं के लिए लगभग 2 लाख पाठ्यपुस्तक की मांग पर 1 लाख 68 हजार 14 पाठ्यपुस्तकें प्राप्त हुई है। पाठ्यपुस्तकों की कमी और स्कैनिंग न होने से वितरण में समस्या आ रही है जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

*ट्रैस करने लगाए बारकोड!*

ज्ञात हो कि पिछले साल बड़ी मात्रा में सरकारी किताबें कबाड़ में मिली थी। जिसे देखते हुए इस बार सभी किताबें के बाहर एक बारकोड लगाया गया है। बारकोड से किताबों को ट्रैस किया जा सकेगा। यदि कोई इन किताबों को कबाड़ खाने में बेचता है तो बारकोड से यह पता चल जाएगा कि किताब किस स्कूल में बांटी गयी थी।

Latest Posts

Don't Miss