जलाशय में मात्र 6 फीट पानी शेष
महासमुंद। गर्मी के दिनों में निस्तारी के लिए तालाबों को भरने के बाद अब कोडार जलाशय में मात्र 6 फीट पानी शेष है। जो कुल भराव क्षमता का साढ़े 8 प्रतिशत है। वर्ष 2022 के बाद यह स्थिति बनी है जब जलाशय में सबसे कम पानी इस वर्ष है, ऐसे से में कोडार को भी अब मानसून का इंतजार है जिससे जलाशय फिर लबालब हो सके।
बता दें कि कोडार जलाशय से जिला मुख्यालय के करीब 50 गांवों को रबी फसल धान की सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। इसके अलावा निस्तारी के लिए करीब 60 गांवो के तालाबों को भरा जाता है। यहाँ से एक साल दांयी नहर (आरबीसी) और एक साल बांयी नहर (एलबीसी) से पानी दिया जाता है। इस साल रबी फसल के लिए पानी नहीं दिया गया, लेकिन निस्तारी के लिए तालाब भरने 1 अप्रैल से 4 मई के बीच आरबीसी नहर से 18 गांव व एलबीसी नहर से 29 गांव को पानी दिया। जानकारी के अनुसार निस्तारी के लिए पानी देने से पूर्व कोडार में 10.80 फीट पानी था। 34 दिनों बारी-बारी से दोनों नहरों से पानी देने के बाद 6 फीट पानी बचा था। जो वर्ष 2022 के बाद सबसे कम है। 2022 में 7.50 फीट, 2023 में 10.70 फीट, 2024 में 6.50 फीट पानी शेष था। गतवर्ष 2024 के मानसून सीजन में अच्छी बारिश न होने से कोडार बांध नहीं भर पाया था। जिससे इस वर्ष रबी फसल के लिए भी किसानों को पानी नहीं दिया गया। केवल निस्तारी के लिए पानी दिया गया। मालूम हो कोडार बांध मानसून पर निर्भर है। बारिश अच्छी होने पर बांध का जलस्तर अच्छा होता है और बारिश न होने पर किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता। लघु जलाशय भी मानसून की बारिश पर ही निर्भर हैं।
*मौसम में बदलाव की संभावना*
इधर, एक-दो दिन में मौसम विभाग ने बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। मालूम हो कि 28 मई को दंतेवाड़ा में पहुंचने के बाद भी मानसून अभी उत्तर छत्तीसगढ़ नहीं पहुंचा है। जिससे बारिश के पानी पर निर्भर किसानों को अब चिंता सताने लगी है। किसान जल्द मानसून आने की संभावना के चलते खाद-बीज से लेकर तमाम तैयारी कर चुके हंै।
जिले में एक जून से अब तक औसत 4.8 मिमी बारिश हुई है। जिसमें महासमुंद विकासखंड में ही 20 मिमी बारिश हुई है। सरायपाली 1.6 मिमी, पिथौरा में 3.4 मिमी, बागबाहरा में 1.5 मिमी, कोमाखान में 2.3 मिमी और बसना में अभी बारिश दर्ज नहीं की गई है। जबकि पिछले साल अब तक मानसून सक्रिय हो चुका था और 13.2 मिमी औसत बारिश हो चुकी थी। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर औसत वर्षा का अनुमान लगाया जाता है।



