अगले 24 घंटे सक्रिय रहेगा मानसून
महासमुंद। रविवार से मानसून एक बार फिर सक्रिय हुआ और बीते दो दिन से रूक-रूककर हो रही बारिश आज सुबह तक जारी रही। पिछले 24 घंटों में जिले में 91.9 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। जो अब तक की सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड है। यह बारिश धान की फसल के लिए अमृत मानी जा रही है वहीं किसानों का मानना है आने वाले दिनों में अगर ऐसी ही बारिश हो तो धान की फसल बर्बाद होने से बच जाएगी।
बता दें कि लंबे ब्रेक के बाद गत रविवार से मानसून फिर एक बार सक्रिय हुआ और प्रदेशभर में लगातार रूक-रूककर तेज बारिश होती रही, जिसका असर जिले में भी देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार एक गहरा अवदाब उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर स्थित है। इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तर ओड़िशा तथा उत्तर छत्तीसगढ़ में पहुंचने की संभावना है। इसके असर से अगले 24 घंटे मानसून सक्रिय रहेगा। बुधवार से फिर वर्षा में गिरावट हो सकती है। पिछले 24 घंटे में जिले के पिथौरा तहसील में सबसे अधिक 141.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं, कोमाखान में 115.9, बागबाहरा में 94.2, सरायपाली में 76.2 मिमी, बसना में 63.4 मिमी और महासमुंद तहसील में सबसे कम 60 मिमी बारिश हुई है। इस दौरान पूरे जिले में 91.1 औसत बारिश हुई है। इसी प्रकार एक जून से अब तक पिथौरा में सबसे अधिक 1194.2 मिमी, बसना में 952.9, बागबाहरा में 805.3, महासमुंद में 766.3 मिमी, सरायपाली में 684.4 और कोमाखान में सबसे कम अब तक 676.6 मिमी बारिश हुई है। इस दौरान पूरे जिले में एक जून के बाद से औसत 846.6 मिमी बारिश हुई है।
इस सीजन में दूसरी बार सबसे अधिक बारिश, 19 दिन नहीं गिरा पानी
मालूम हो कि इस साल मानसून शुरू होने के बाद अब तक गत 24 घंटे में सबसे अधिक 91.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इससे पहले 24 जुलाई को जिले में 84.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई थी। इस दिन पिथौरा तहसील में 112.7 मिमी, महासमुंद में 105 मिमी, बागबाहरा में 93.7 मिमी, कोमाखान में 83.0 मिमी, बसना में 78.4 मिमी और सरायपाली में 35.9 मिमी बारिश हुई थी। बाकी दिनों में औसत बारिश 30 मिमी के भीतर ही हुई है। आंकड़ों के अनुसार एक जून से अब तक पूरे जिले में 19 दिन पानी ही नहीं गिरा।
गत वर्ष की अपेक्षा 7.4 मिमी अधिक बारिश
बता दें कि गत वर्ष आज दिनांक तक पूरे जिले में 839.2 मिमी बारिश हुई थी। जबकि इस साल अब तक 846.6 मिमी बारिश हो चुकी है जो गत वर्ष की बारिश से 7.4 मिमी अधिक है। जिले में कुल संभावित बारिश का 85.2 प्रतिशत बारिश हो चुकी है।
खेतों में पड़ने लगी थीं दरारें, पीले पड़ने लगे थे धान के पौधे
बता दें कि अगस्त माह के आखिरी दिनों में अच्छी बारिश के बाद से लंबे ब्रेक के बाद जिले में सूखे के हालात बनने लगे थे।खेतों में भरा पानी तेजी से सूख रहा था। वहीं जिले के कई हिस्सों में जमीनों में दरारें पड़नी शुरू हो गयी थी। इससे धान के पौधे मुरझाकर पीले पड़ने लगे थे। बारिश के अभाव में खासकर अर्ली वेरायटी के धान की फसल को ज्यादा नुकसान हो रहा था। क्योंकि, अर्ली वेरायटी के पौधों में बालियां निकलने का समय है और इस दौरान खेतों में पानी न होने के कारण बालियां निकल नहीं पा रही हैं और जिन खेतों में बालियां निकल भी रही है, तो सूखने की कगार पर थी, पर दो दिन से हो रही बारिश किसानों के लिए अमृत वर्षा के समान है। हालांकि किसानों की मानें तो यह बारिश पर्याप्त नहीं है, पर फसल बचाने में यह बारिश सहायता जरूर करेगी।



