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गाय का शिकार, पीढ़ी बांधा और नाले के पास दिखे बाघ के पैरों के निशान

जंगल से दूर रहने वन विभाग गांवों में करा रहा मुनादी

महासमुंद। सिरपुर क्षेत्र के लगभग दर्जनभर गांवों के ग्रामीण पिछले दो दिनों से बाघ की दहशत में हंै। वन विभाग की टीम लगातार मानिटरिंग कर रही है वहीं गांवों में लगातार मुनादी करा ग्रामीणों को बाघ से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
बता दें कि सिरपुर-छपोराडीह मार्ग में गुरुवार शाम शिक्षक काशीराम पटेल ने एक बाघ को अपने कैमरे में कैद किया। उन्होंने बताया कि वह बांसकुड़ा से सिरपुर की तरफ कार से जा रहे थे इसी दौरान मुख्य मार्ग पर एक बाघ रास्ते को पार करते अचानक दिखा और वह बीच वाली रोड में पीढ़ी बांध से अचानकपुर की ओर पार किया। जिसके बाद से वन विभाग सतर्क हो गया और आस-पास के गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को सचेत रहने कहा। शुक्रवार को बाघ ने एक गाय और एक बछड़े को अपना शिकार बनाया है। छपोराडीह निवासी रामप्रसाद साहू ने बताया कि बाघ ने गाय का शिकार किया है वहीं गाय के साथ बछड़ा भी था जो अब तक वापस नहीं आया है। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी गांव पहुंचा और रामप्रसाद को मुआवजा देने संबंधी औपचारिकता पूरी की। वन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार बाघ वयस्क है जिसके पैरों के निशान पीढ़ी बांधा और नाले के पास देखे गए हैं। बाघ को ट्रेक करने के लिए वन विभाग बलौदाबाजार, महासमुंद और वन विकास निगम की 7 टीमें अलग-अलग क्षेत्र में नजर रखी हुई है और ग्रामीणों से अपील कर रही है कि जंगल से दूर रहें और यदि बाघ से किसी प्रकार की जनहानि हो तो तत्काल वन विभाग को सूचित की जाए।
एक दर्जन गांव में अलर्ट
मालूम हो कि गुरुवार छपोराडीह के पास देखा गया बाघ शनिवार शाम अचानकपुर के खिरसाली में दिखाई दिया जिसके बाद से ही छपोराडीह, पीढ़ी, अचानकपुर, सेनकपाट, खड़सा, सिरपुर, मोहकम, रायतुम, सुकुलबाय, पासीद और अमलोर सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों को लगातार बाघ से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। बाघ की दहशत के चलते यहाँ के ग्रामीण दिन में भी अपने खेत और गाँव के बाहर नहीं जा रहे हंै।
पहले हाथी अब बाघ से परेशान ग्रामीण
बता दें कि पहले उक्त क्षेत्र हाथियों के लगातार विचरण के कारण परेशान था। हाथियों का झुंड़ जहां किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहा था वहीं हाथियों से जनहानि भी हुई। पिछले एक साल से इन गांवों के ग्रामीणों को हाथियों से छुटकारा मिला तो वह अब बाघ के क्षेत्र में विचरण से दहशत में है। महासमुंद रेंजर तोषराम सिन्हा ने  बताया कि इससे पहले इस क्षेत्र में साल 2010-11 में बाघ देखा गया था। बाघ को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं।

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