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आरटीई :पांच सत्र में खाली रह गई 1568 सीटें

10 हजार 95 सीटों के विरूद्ध 8527 सीटों में प्रवेश

महासमुंद। जिले के निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत इस साल भी पूरी सीटें नहीं भर पाई हैं। 1676 में से 117 सीटें खाली रह गईं। पालक बड़े निजी स्कूलों  और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं, यही कारण है हिन्दी स्कूलों की सीटें रिक्त रह जाती हंै। शिक्षण सत्र 2019-20 से इस शिक्षण सत्र तक कुल 10 हजार 95 सीटों में 8 हजार 527 सीटें भरी और 1568 सीटें रिक्त रह गई।
बता दें कि कोरोनाकाल से ही आरटीई के तहत प्रवेश की प्रक्रिया में देरी हो रही है। शिक्षण सत्र 2023-24 के लिए जिले की 207 निजी स्कूलों में शिक्षा अधिकार अधिनियम प्रथम चरण में कुल 1676 के लिए 2775 आवेदन प्राप्त हुए थे। सत्यापन के बाद पात्र 2140 आवेदनों की लाटरी निकाली गई जिनमें 1379 का चयन हुआ। इसके बाद दूसरे चरण में बची 297 सीटों के लिए 424 नये आवेदन प्राप्त हुआ नये और पुराने आवेदन की लाटरी के बाद कुल 180 का चयन दूसरे चरण में हुआ। बाद अब भी 117 सीटें रिक्त है। पहले चरण की प्रक्रिया मार्च से शुरू होती है। जिसकी प्रथम सूची मई माह के अंतिम सप्ताह में जारी की जाती है। जून में प्रवेश दिया जाता है और जुलाई में दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होती है और अगस्त में प्रक्रिया समाप्त होती है। प्रक्रिया लंबी होने से बच्चों की पढ़ाई भी पिछड़ जाती है। शिक्षा विभाग के आरटीई प्रभारी देवेश चंद्राकर ने बताया कि ज्यादातर पालक बड़े स्कूलों का चयन करते हैं, लेकिन वहां तय सीट के हिसाब से ही प्रवेश मिलता है। शेष बच्चे छूट जाते हैं, इस कारण सीटें रिक्त रह जाती है।
नियम बदलने से घट गई 554 सीटें
इस साल दर्ज संख्या के एवज में 25 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश दिए गए। जानकारी के अनुसार आरटीई के तहत इस साल नियमों में बदलाव के चलते 554 सीटों की कमी हो गई है। नियम में बदलाव के पूर्व स्कूल की क्षमता के हिसाब से प्रवेश दिया जाता था। इस नियम के लागू होने से निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगी। पिछले कई सालों से स्कूलों में आरटीई की सीटें न तो बढ़ी और न ही घटी। कई सालों से निर्धारित सीटों पर ही प्रवेश दिए जा रहे थे। संख्या कम होने पर न तो सीट कम कर रहे हैं और न ही बढ़ने पर बढ़ा रहे हैं। जिससे शासन को भी नुकसान हो रहा था। साथ ही बच्चे जिस स्कूल में पढ़ना चाह रहे थे वह भी उसमें नहीं पढ़ पा रहे थे।
पांच सालों में कोरोनाकाल के समय 596 सबसे अधिक सीटें रिक्त
जानकारी के अनुसार शिक्षण सत्र 2019-20 से 2023-24 तक कुल 1568 सीटें रिक्त रहीं। जिसमें शिक्षण सत्र 2021-22 में कुल 2168 सीटों में मात्र 1572 का दाखिला हुआ वहीं 596 सीटें रिक्त रही यह कोरोनाकाल का समय था।


पिछले पांच वर्षों में आरटीई के तहत रिक्त सीटों का आंकड़ा
वर्ष कुल सीट चयन. रिक्त सीट
2019-20 2049 1720 329
2020-21 2046 1776 270
2021-22 2168 1572 596
2022-23 2156 1900 256
2023-24 1676 1559 117

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