जांजगीर-चांपा (संवाद साधना)। जिले में व्हीआईपी कल्चर खत्म करने के दावों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सिस्टम और सत्ता के रुतबे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी कार्यालय से निकल रहे मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के काफिले के दौरान चांपा की ओर से आ रही मरीज से भरी एंबुलेंस को रोक दिया गया। एंबुलेंस को करीब एक मिनट तक काफिले के गुजरने का इंतजार करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि काफिले में शामिल नेताओं के वाहन बिना रुके आगे बढ़ते रहे, जबकि पुलिस की पायलट गाड़ियों ने भी एंबुलेंस को रास्ता देने की कोई कोशिश नहीं की। यातायात पुलिसकर्मी एंबुलेंस के सामने खड़े नजर आए और मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस व्हीआईपी काफिले के गुजरने का इंतजार करती रही। एक तरफ सरकार व्हीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करती है, तो दूसरी तरफ सड़क पर एंबुलेंस को रोकने की यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। यह मामला सिर्फ एक मिनट के इंतजार का नहीं है, बल्कि उस सोच पर सवाल है जहां मरीज की जिंदगी से ज्यादा अहम व्हीआईपी काफिले की आवाजाही नजर आती है। एक मिनट किसी व्हीआईपी के लिए सामान्य इंतजार हो सकता है, लेकिन मरीज के लिए यही एक मिनट जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन सकता है। अब सवाल यह है कि आखिर किसकी प्राथमिकता ज्यादा है व्हीआईपी रुतबा या मरीज की जिंदगी की।



