अभिनेत्री और मिमिक्री आर्टिस्ट आशा जायसवाल सिंह का निधन हो गया है। उनके बेटे आकाश सिंह भारद्वाज ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि उनका निधन 22 अगस्त को शाम करीब 7:30 बजे हुआ।
फिल्म और टीवी जगत में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेत्री आशा सिंह का 22 अगस्त को मुंबई में निधन हो गया। उनके बेटे आकाश सिंह भारद्वाज के अनुसार वह पिछले तीन महीनों से फेफड़ों के इन्फेक्शन से जूझ रही थीं और शुक्रवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन से फिल्म और टेलीविजन जगत को गहरा दुख पहुंचा है। उनके अचानक निधन से उनके परिवार, दोस्तों और करीबियों को गहरा सदमा लगा है। आशा सिंह के बेटे आकाश के अनुसार उनका अंतिम संस्कार आज ही किया गया है, जिसमें उनके नागपुर के चाचा भी शामिल हुए थे।
आशा सिंह का निधन
आकाश सिंह भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी मां आशा सिंह के निधन की खबरे देते हुए दुख जताया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने दुख जाहिर करते कहा कि मेरी मां और मैं एक-दूसरे के लिए थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए दुनिया को अलविदा कहा है। आशा सिंह के फैंस ने भी शोक संदेश पोस्ट किए हैं। उनके जाने से उन लोगों के बीच एक खालीपन आ गया है, जिन्होंने सालों तक इंडस्ट्री में उनके काम को सराहा। एक्ट्रेस को हमेशा भारतीय फिल्मों और टेलीविजन शो में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा।
आकाश सिंह भारद्वाज ने मां आशा सिंह को दी श्रद्धांजलि
उन्होंने सोशल मीडिया पर आशा सिंह की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘मेरी माताश्री आशा जायसवाल सिंह, चरित्र अभिनेत्री, समाजसेविका, भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट (मीना कुमारी की आवाज) और भारत की पहली विश्वव्यापी एंटरटेनमेंट मैनेजमेंट कंपनी आशा इवेंट्स एंड फिल्म्स की संस्थापक, मालिक एवं संचालक का 22 अगस्त 2026 को शाम 7:30 बजे निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार 23 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे पवन हंस श्मशान भूमि, विले पार्ले वेस्ट में होगा। वह एक कर्मठ आयरन लेडी थीं। आप सभी उनकी आत्मा की सद्गति और शांति के लिए प्रार्थना करें। साथ ही उनके काम को सोशल मीडिया पर जरूर देखें और उन्हें याद रखें ताकि उनकी आत्मा जहां भी हो। यह देखकर प्रसन्न हो कि आप आज भी उनके काम को देख और याद कर रहे हैं। क्योंकि उनके जीवन में कर्म ही सब कुछ था, और यही कर्म उनकी मृत्यु के बाद उन्हें ब्रह्मानंद और मोक्ष प्रदान करें, इसी आशा के साथ मैं यह संदेश प्रसारित कर रहा हूं। मृत्यु का दुख नहीं, आनंद और ब्रह्मानंद—यही उनका संदेश था।’



