नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दायर किया। इसमें आयोग ने अपने कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का बचाव किया है। चुनाव आयोग ने अनियमितताओं के आरोपों को खारिज कर दिया और उस याचिका के आधार पर ही सवाल उठाए, जिसमें आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।
याचिका पूरी तरह समाचार रिपोर्ट पर आधारित- चुनाव आयोग
‘बार एंड बेंच’ के अनुसार, चुनाव आयोग ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से केवल एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर किए गए इस हलफनामे में कई मुद्दों पर जवाब दिया गया है। इनमें आयोग की आंतरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण फॉर्म में कथित बदलाव, नामों को हटाना और मतदाता डेटाबेस के कामकाज से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।यह जवाब तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी औरzINDI गठबंधन के अन्य नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर चुनाव आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था।
याचिकाकर्ताओं ने आधिकारिक रिकॉर्ड
सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने, हटाए गए मतदाताओं की बूथ-वार सूची देने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बिना किसी नोटिस या अपनी बात रखने का मौका दिए पात्र मतदाताओं के नाम न हटाए जाएं।



