चांपा। देवी आराधना का पर्व नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा के लिए विशाल पण्डाल स्थापना का चलन बढ़ रहा है। वैसे तो नगर के हर मोहल्ले में प्रतिमा स्थापित कर सार्वजनिक रूप से दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया, वहीं बड़े बजट वाले वृहद रूप में आयोजन की संख्या भी बढ़ रही। कोरबा रोड, सिवनी मोड़, सदर बाजार, पोस्ट ऑफिस के पास, सुभास चौक जैसे प्रमुख बड़े पंडाल रहे जहाँ माँ दुर्गा के अतिरिक्त और भी आकर्षण के केन्द्र रहे। नगर में दुर्गा पूजा आयोजन का इतिहास काफी प्राचीन रहा है। बताया जाता है कि करीब पांच दशक पूर्व कदम चौक से इसकी शुरुआत हुई थी। इसके बाद साल दर साल मोहल्ले, कालोनियों में माँ दुर्गा मूर्ति स्थापन व सार्वजनिक पूजा आयोजन की संख्या बढ़ती रही। अब तो हर वार्ड व मोहल्ले में आयोजन किया जा रहा है, इसके साथ बड़े बजट के विशाल व आकर्षक आयोजनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार प्रमुख आकर्षण वाले आयोजनों में सबसे अधिक आकर्षक कोरबा रोड सिवनी मोड़ के पास का आयोजन रहा, जहाँ नगर के सबसे बड़े पण्डाल का निर्माण किया गया था। सदर बाजार रोड पोस्ट ऑफिस के पास के विशाल दुर्गा पण्डाल में माँ दुर्गा की प्रतिमा के अतिरिक्त 12 ज्योतिर्लिंग की आकर्षक झांकी प्रदर्शित की गई थी। सुभास चौक के पास के विशाल पण्डाल में सनातन की यज्ञ शाला , सात सफेद घोड़ों पर सवार सूर्यदेव, पाण्डव के वनवास आदि की आकर्षक झांकी लगाई गई थी। इन पण्डालों में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तांता लगा रहा।
बाँस की टोकरी से बना सिवनी चौक का पूरा पण्डाल व झांकी–कोरबा रोड सिवनी चौक के पास के पण्डाल की विशेषता रही कि विशाल पण्डाल का निर्माण बाँस की टोकरी की सहायता से किया गया। बाँस की टोकरी से ही पण्डाल के खम्भे, दीवार, पिलर, खिड़की आदि सब बनाये गये। पण्डाल के अंदर विशाल देवी दरबार बनाया गया था जिसमें बाँस की टोकरी से ही तैयार नौ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई जिसे एक लाइन में क्रम से रखा गया। वहीं दूसरी ओर बाँस की टोकरी से ही तैयार भगवान के सभी अवतारों की झांकी प्रदर्शित की गई। सामने में माँ दुर्गा, भगवान गणेश, माँ सरस्वती, माँ लक्ष्मी व देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई।
पुलिस प्रशासन के लिए बढ़ रही चुनौतियां–वृहद आकार में आयोजनों की संख्या बढ़ने व हजारों दर्शनार्थियों के उमड़ने से पुलिस प्रशासन की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। ऐसे आयोजन स्थल में यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखना व अव्यवस्था-भगदड़ी की स्थिति निर्मित न हो, बड़ी चुनौती रहती है। पूरे नौ दिनों तक पुलिस अधिकारियों व जवानों को सजगता व योजनाबद्ध होकर कार्य करना पड़ता है।



