सोलवां जलाशय ने खोल दी थी पोल वन विभाग द्वारा निर्माण कार्य के गुणवत्ता को ताक पर रखा गया है। इस बात की पोल बीते दिनों सोलवा स्थित जलाशय ने खोल दी थी जलाशय निर्माण का कार्य भी ठेकेदार से कराया गया था । जलाशय में निकासी के लिए निर्मित नहर पहले ही बारिश में बह गया ,जबकि बंड में भी दरारें आ गई थी। वन परिक्षेत्र पसरखेत हमेशा ही सुर्खियों में रहता

कोरबा : वन विभाग में ठेकेदारी प्रथा हावी हो गया है , जिसका खामियाजा मेहनतकश मजदूरों को भुगतना पड़ रहा। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमे नियमो को ताक पर रख स्टाप डेम निर्माण का ठेका दे दिया गया। ठेकेदार ने स्थानीय के बजाय कैंपिंग मजदूरों से काम तो कराया, पर उन्हें उनकी पूरी मजदूरी का भुगतान नहीं किया। जब दफ्तर का चक्कर काट चुके मजदूरों ने जवाबदार लोगों से संपर्क किया तो मेहनताना के बजाय परिवार सहित उठवा लेने की धमकी मिली। जिससे भयभीत मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पहुंच न्याय की गुहार लगाई है।
यह पूरा मामला कोरबा वन मंडल के वन परिक्षेत्र पसरखेत का है। पसरखेत के छुई ढोंढा के कक्ष क्रमांक पी 1129 में डबल्यूएचएस 7 स्टॉप डेम का निर्माण कराया गया है। स्टॉप डेम निर्माण के काम में लगे दर्जन भर मजदूर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। जहां ढेलवांडीह निवासी अरुण कुमार ने बताया कि स्टॉप डेम निर्माण का ठेका मनदीप सिंह भाटिया को दिया गया था । उन्होंने राहुल शुक्ला को निर्माण कार्य की जवाबदारी दी थी। हमें राहुल शुक्ला ने काम करने के लिए भेजा था। इस दौरान 600 प्रतिदिन रोजी देने की बात कही गई थी । करीब 21 मजदूरों ने लगातार चार माह तक कार्य किया। ठेकेदार द्वारा सामग्री आपूर्ति में देरी के कारण निर्माण कार्य में भी लेट लतीफी हुई । जब निर्माण कार्य के बाद मजदूरी के लिए कहा गया तो डीएफओ कार्यालय जाने की बात कही गई । डीएफओ ने सात दिवस के भीतर भुगतान हो जाने की बात कही थी । डीएफओ कार्यालय से 30 लाख रुपए का चेक मिलने पर रुपए आ जाने की बात कही गई। दो मर्तबे हिसाब किताब के लिए बिलासपुर बुलाया गया। वे दूसरी बार बिलासपुर पहुंचे तो किसी ईशु पांडे से बात कर लेने कहा गया । उनसे संपर्क करने पर पत्नी और बच्चों को उठवा लेने की धमकी दी गई। जिससे सभी मजदूर दहशत में आ गए। स्टॉप डेम निर्माण में कार्य करने के बावजूद उन्हें मजदूरी के लिए दफ्तर और ठेकेदार का चक्कर काटना पड़ रहा है । करीब 21 मजदूर है,जिनका लाखो रुपए का भुगतान नहीं हुआ है । छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश मंत्री दिलीप मिरी ने कहा कि वन विभाग द्वारा स्टॉप डेम निर्माण का ठेका दिया गया था। ठेकेदार द्वारा मजदूरों से करीब चार माह काम कराया गया है। उन्हें अब मजदूरी देने के बजाय धमकी दी जा रही है । यह बिल्कुल गलत है । हम मज़दूरों के साथ हैं। उनका भुगतान कराई जाए।
मजदूरों को मनाने का करते रहे प्रयास
किसी ईशु नामक व्यक्ति से धमकी मिलने पर मजदूर घबरा हुए है। वे न्याय की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे । जिसकी भनक वन अफसरों को लग गई। पसर खेत रेंजर सहित एक अन्य अफसर ने मोबाइल पर संपर्क करना शुरू कर दिया। हालांकि मजदूरों ने दफ्तर आने से इंकार कर दिया।



