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छत्तीसगढ़ के चरोदा निवासी भरत कुमार”का स्वर्णिम अक्षरों में नाम का दर्ज

आज का दिन भारत के लिए गौरव का दिन है जो सारी दुनिया ना कर सकी उसे इसरो के वैज्ञानिक ने कर दिखाया जिसमें छत्तीसगढ़ के ग्राम चरौदा युवा वैज्ञानिक भारत कुमार ने भीअपनी सहभागिता निभाई

कोरबा….. वर्ष 2014, कोयले के ढेर में हीरा तलाशने निकले रामदास जोगलेकर, उनके साडू भाई अरुण और अरुण की पत्नी वनजा भावे। पहुंचे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भिलाई से 9 किलोमीटर दूर चरोदा में हीरा तलाशने, जो कोयले, लोहा अयस्क और गरीबी के बीच फंसा हुआ था।

चरोदा भारतीय रेलवे का मार्शलिंग यार्ड है, जहां खदानों से आए कोयले और लोहे का ढेर आता है। फिर इन्हें भिलाई से होते हुए देश के कई हिस्सों में पहुंचाने के लिए ब्रॉडगेज ट्रेनों पर लादा जाता है। यहां कुछ घंटे खड़े होने पर ही आपके कपड़ों और शरीर पर कोयले की काली परत जम जाएगी।

यहां उन्हें एक लड़का मिला जो अपनी 10 बाय 10 की झोपड़ी के बाहर बैठकर बर्तन धो रहा था, जबकि उसकी मां उन कामगारों के लिए इडली और अन्य नाश्ता बेच रही थी जो यहां से रोजाना नाका जाते थे, ताकि उन्हें ठेकेदार से काम मिल सके।

रामदास और वनजा ने लड़के से पूछा- यहां भरत कुमार कहां मिलेगा? क्योंकि आज के अखबारों में खबर छपी थी कि, केंद्रीय विद्यालय बीएमवाई (भिलाई मार्शलिंग यार्ड) के उस छात्र ने फिजिक्स में 99 केमिस्ट्री में 98 और गणित में 99 अंक हासिल किए थे और वह आईआईटी में पढ़ना चाहता था, किंतु इसमें गरीबी बाधा थी। दोनों इस लड़के से मिलकर उसकी आर्थिक मदद करना चाहते थे। ताकि वह अपना सपना पूरा कर सके।

दोनों ने देखा कि उस झोपड़ी में एक छोटी बच्ची बैठ कर पढ़ रही है। बच्चों का पिता सिक्योरिटी गार्ड था और ड्यूटी पर गया था। लड़के ने बर्तन धोकर हाथ पोंछे और पास आकर बोला- बताइए! मैं ही भरत कुमार हूं।
उन्होंने लड़के की अंकसूची मांगी और उसकी बुद्धिमत्ता देखकर हैरान रह गए। रामदास और वनजा के पति अरुण ने फैसला किया कि वे भारत की आईआईटी कोचिंग का खर्चा उठाएंगे।

कोयले में दवा हीरा साल दर साल चमकदार होता गया। उसे आईआईटी धनबाद में दाखिला मिल गया। हर सेमेस्टर रामदास और अरुण उसे एक निश्चित प्रतिशत लाने की चुनौती देते, जिसके बदले उसे नगद पुरस्कार मिलता। पहला सेमेस्टर छोड़कर, भरत ने सातवें सेमेस्टर तक मेकेनिकल इंजीनियरिंग में टॉप किया और आईआईटी से गोल्ड मेडल जीता। केंपस इंटरव्यू में मैकेनिकल ब्रांच से केवल उसी का चयन एक बड़े सरकारी संस्थान में हुआ।

अब आते हैं 18 अगस्त 2023 पर। इस दिन भारत ने अपने चंद्र अभियान में एक और जरूरी कदम बढ़ाया और चंद्रमा के दक्षिणी भाग पर लैंडिंग करने के और करीब पहुंच गया। आज chandrayaan-3 सफलता पूर्वक लैंडिंग कर ली है

देश के सैकड़ों बौद्धिक लोगों के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो की भी इस पर नजर बनाए रखी। और इन लोगों में शामिल है वही “भरत कुमार” जिसे इसरो ने 2019 में चुना था। वही कोयले में दबा हुआ चमकदार हीरा, जो आज इसरो में चंद्रयान की सफलता के लिए स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया

तात्पर्य है कि हीरा सड़क पर नहीं मिलता। उस हीरे को तलाशना पड़ता है और फिर कड़ी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही उसे चमक मिलती है जो हमेशा बरकरार रहती है ।

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