पिता ने अपनी बहनों का फर्जी हस्ताक्षर व सहमति-पत्र बनाकर निकाले दो साल की बोनस राशि
इस खेल में पुत्र, अधिवक्ता को किया शामिल
रायपुर,(संवाद साधना)। एक भाई ने अपनी तीनों बहनों का फर्जी अंगूठा लगाकर अपने स्वर्गीय पिता समारु राम के जिला केंद्रीय बैंक के खाते में जमा 40560 रुपए को बेटे के साथ मिलकर अपने खाते में स्थानांतरण करा दिया। प्रथम श्रेणी न्यायाधीश रायपुर से परिवार पत्र जांच के बाद मंदिर पुलिस ने प्रार्थिया के बड़े भाई, उसके बेटे, कृषक और अधिवक्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में लिया है। यह पूरा मामला मंदिर हसौद थाना क्षेत्र का है। इस खेल में फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कराने वाले पिता ग्राम उमरिया निवासी रामकिशुन, उसके पुत्र रामनाथ जोशी, कृषक बालकरण यादव और नोटरी प्रमाणित करने वाले अधिवक्ता महासमुंद निवासी हामिदुल्ला शामिल है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
मंदिर हसौद थाने में पदसथ उपनिरीक्षक ने बताया कि न्यायालय श्रीमान न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी रायपुर से परिवाद पत्र जांच के लिए प्राप्त हुआ था, जिसमें आरोपी रामकिशुन जोशी, रामनाथ जोशी, बालकरण यादव व नोटरी हामिदुल्ला खान से पुछताछ कर कथन लिया गया। जांच में पाया गया कि उपरोक्त आरोपी अपने लाभ के लिए प्रार्थिया उर्मिला बंजारे, परमिला बाई व दुकलहिन बाई का फर्जी अंगुठा निशान लगाकर कुटरचित दस्तावेज बनवाकर धोखाधड़ी कर केन्द्रीय सहकारी बैंक मंदिर हसौद में आरोपी के पिता स्व. समारू राम जोशी के खाता में आए सन 2014-15 एवं 2015-16 का बोनस राशि 40,560 रुपए को आरोपी रामनाथ जोशी, रामकिशुन जोशी ने खाता के पैसा को रामकिशुन के खाते में स्थानांतरण करवाकर धोखाधड़ी फर्जी तरीका से निकाला है, जिसमे नोटरी हामिदुल्ला खान द्वारा फर्जी सहमति पत्र बनाकर सील मुहर लगाकर आरोपियों को दिया है। तथा बालकरण यादव ने फर्जी सहमति-पत्र में गवाह बनकर अपना हस्ताक्षर किया है। जांच पर उपरोक्त आरोपियों के विरूद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज कर विवेचना मे लिया गया।
न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने की कार्रवाई
प्रार्थियों ने 5 मार्च 2024 को वरिष्ट पुलिस अधीक्षक रायपुर और शाखा प्रबंधक जिला सहकारी बैंक शाखा मंदिर हसौद रायपुर को 7 मार्च 2024 को लिखित शिकायत किया था, जिसके साथ हस्तलिपि विशेषज्ञ द्वारा जांच कर दिया गया। प्रमाण-पत्र को संलग्न किया गया है, जिसमें स्पष्ट लिखा गया है सहमति-पत्र पर जो हस्ताक्षर किया गया है। वह प्रार्थियों का नहीं है, एवं फोटो सहमति पत्र में भी चस्पा नहीं है। पुलिस से कार्रवाई नहीं होने के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इसके बाद जांच हुई तो आरोप सही पाया गया। न्यायालय ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए आदेश किया।



