सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र फेस वन में गुरुवार को सुबह तकरीबन साढ़े 10 बजे जेसी रिक्लेमेशन नामक टायर से ऑयल बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग भडक़ उठी। सूचना मिलते ही करीब आधा दर्जन दमकल वाहन मौके पर पहुंच गए और घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस घटना ने न केवल फैक्ट्री की सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पास ही स्थित आईओसी वाटलिंग रिफिलिंग प्लांट के आसपास सुरक्षा की संवेदनशीलता को भी उजागर किया है।
चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह कंवर ने बताया कि फैक्ट्री के मालिक संदीप सिंघल और उनके पार्टनर अनिल सिंह हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि फैक्ट्री में फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारियों ने केवल पानी डालकर आग को रोकने का प्रयास किया और जान बचाकर बाहर निकलने को मजबूर हुए। इस फैक्ट्री के पीछे सडक़ के दूसरी ओर आईओसी का वाटलिंग रिफिलिंग प्लांट स्थित है, जहां प्रतिदिन सैंकड़ों घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों में गैस भरी जाती है। अगर आग की कोई चिंगारी इस प्लांट तक पहुंच जाती, तो बड़ा हादसा टलता नहीं। अधिकारियों की यह जिम्मेदारी थी कि ऐसे खतरनाक उद्योग के पास कोई संवेदनशील प्लांट न हो, लेकिन यह अनुमति किसने दी, यह अब सवाल बन गया है।

सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं
ग्रामीण भी फैक्ट्री की गतिविधियों से परेशान हैं। सिलतरा, सांकरा, सोंडरा, टाडा और आसपास के आधा दर्जन गांवों में टायर जलाकर ऑयल बनाने की प्रक्रिया से उत्पन्न दुर्गंध से लोगों की स्वास्थ्य समस्या बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दुर्गंध के कारण सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। फैक्ट्री श्रमिकों ने बताया कि सुबह अचानक आग लगी और फायर सिस्टम न होने के कारण उन्हें जान बचाकर बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि आग इतनी तेजी से फैली कि दो-तीन किलोमीटर दूर तक धुआं दिखाई दे रहा था। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। इस दौरान फैक्ट्री की अनुमति और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की पूरी जांच की जाएगी।



