Saturday, February 7, 2026

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विवेक रहाटगांवकर जी की कविता पर एक नजर

शंकर पार्वती के बेटा हंस तैं
कार्तिकेय के संग भाई हंस तैं
रिद्धि सिद्धि के गोसयिया हंस तैं
शुभ लाभ के ददा हंस तैं
ये दुनिया के दुखहर्ता हंस तैं
मोर मन मा हरदम रहित हंस तैं
कोन्हों कहे गजानन कोन्हों कहे गनेस
हम सब ला पार लगात हंस तैं
जय हो जय हो जय हो गनेस


विवेक रहाटगांवकर

शिक्षक दिवस पर एक छोटी सी रचना
शिक्षक ला एक दिन पूजे जाथै
बाकी दिन वोला पूजे जाथे
एक दिन बड़ सुरता आथे
दूसरैया दिन वोला भूला जाथे
रुपया पैसा कुछू नहीं चाहे
सिरिफ थोकुन मान चाहे
लोगन ले वो पथरा पाए
लोगन ला फल देवत जाए
विवेक रहाटगांवकर

कहते हैं दिन सुख देता है
रातें बहुत दुख देती है
गौर से देखें हम सब तो
रातें दिन का दुख हर लेती हैं
दिन भर की करतूतों को ये
अपने संग समों। लेती हैं
नवरात्रि की ये नवराते हैं
जीवन में सुख भर देती हैं
मां की कृपा बनी रहे तो
आशीषों से घर भर देती है

विवेक कुमार रहाटगांवकर

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