रायपुर, संवाद साधना। आंजनेय विश्वविद्यालय ने देश की प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं सामाजिक संस्था बोश इंडिया फाउंडेशन के साथ ऑटोमोटिव कौशल विकास कार्यक्रम के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत आंजनेय विश्वविद्यालय को प्रशिक्षण सहयोगी के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक और उद्योग आधारित कौशल से भी सशक्त बनाना है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने इसे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि इससे युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा के नए द्वार खुलेंगे। इस साझेदारी के तहत विद्यार्थियों को 300-300 घंटे के दो विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए जाएंगे, जिसके तहत ऑटोमोटिव सेवा तकनीशियन के लिए , ऑटोमोटिव सेवा सलाहकार (2-व्हीलर) के लिए लगभग दो माह प्रशिक्षण कक्षा शिक्षण, कंप्यूटर प्रयोगशाला, इन-हाउस ऑटोमोटिव प्रयोगशाला और डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल्स के माध्यम से दिया जाएगा।
ग्रामीण युवाओं को मिलेगा अवसर
इस कार्यक्रम विशेष रूप से जो न तो शिक्षा, न रोजगार और न ही प्रशिक्षण में हैं ऐसे युवाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है। इससे वे युवा जो संसाधनों के अभाव में अवसरों से वंचित थे, अब अपने करियर की नई शुरुआत कर सकेंगे। यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। बोश इंडिया फाउंडेशन और विश्वविद्यालय मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।



