रायपुर, संवाद साधना। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ सोशलिस्ट चिंतक रघु ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार वंचितों के शांतिपूर्ण आंदोलनों की उपेक्षा करेगी, तो लोकतंत्र कमजोर होगा। रायपुर प्रेस क्लब में गसविनय अवज्ञा, आदिवासी समाज, लोकतंत्र और सत्याग्रहग विषय पर बोलते हुए उन्होंने आदिवासी समाज के संघर्ष, सरकारी उदासीनता और हिंसा की राजनीति पर गहरी चिंता जताई। रघु ठाकुर ने धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र को अहिंसा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यहां आदिवासी दशकों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक वनाधिकार, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने 1952 में डॉ. लोहिया द्वारा शुरू किए गए वनाधिकार आंदोलन को याद करते हुए कहा कि यही आंदोलन 2007 के वनाधिकार कानून की नींव बना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन जो लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, उनकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिगी में विस्टा प्रोजेक्ट पर 25 हजार करोड़ खर्च किए जा सकते हैं, लेकिन आदिवासियों को गंगरेल बांध का मुआवजा तक नहीं मिला। रघु ठाकुर ने आदिवासी क्षेत्रों में उद्योग लगाने की स्थिति में 25त्न हिस्सेदारी आदिवासियों को देने, और उचित मुआवजा व पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही धर्म-परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि कोई भी लालच आधारित परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है।



