Ripur News:रायपुर। विमतारा सभागार में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम स्व. विश्वेंद्र ठाकुर के व्यंग्य उपन्यास किस्सा बहराम चोट्टे का 65 वर्ष बाद पुनर्मुद्रण पश्चात विमोचन हुआ। छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से आए लगभग 300 से अधिक साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने इस उपन्यास के विमोचन समारोह में भागीदारी निभाई ।
Ripur News: इस उपन्यास के साथ-साथ किस्सा बहराम चोट्टे का : स्वातंत्र्योत्तर भारत के हिंदी साहित्य में प्रासंगिकता विषय पर केंद्रित आलेखों के संग्रह का भी विमोचन किया गया, जिसे मूर्धन्य साहित्यकारों, आलोचकों एवं पत्रकारों ने लिखा है।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि सबसे पहले यही तथ्य रेखांकित करना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि आजादी के बाद के हिंदी साहित्य का पहला व्यंग्य उपन्यास किस्सा बहराम चोट्टे का था। कितने लोगों को यह पता है कि सन 1962 में एक व्यंग्य उपन्यास किस्सा बहराम चोट्टे का प्रकाशित हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार बलदेव भारती (भाटापारा), रवि श्रीवास्तव ( भिलाई), रामेश्वर वैष्णव, गिरीश पंकज, विनोद साव (भिलाई), डॉ महेंद्र कुमार ठाकुर, महासमुंद से अशोक शर्मा, ईश्वर शर्मा, करीम घोंघी, बंधु राजशेखर खरे, भाटापारा से ऋषि साव, राजकुमार शर्मा, राजेश गुप्ता, रायपुर से रामेश्वर शर्मा, शशांक शर्मा (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी), निकष परमार, सुदीप ठाकुर, डॉ सुशील त्रिवेदी, डॉ सुधीर शर्मा, डॉ रमेंद्र नाथ मिश्र, शशांक खरे, अनिरुद्ध दुबे, श्रीमती सुमन शर्मा बाजपेई, भारती यादव, शकुंतला तरार आदि साहित्यकार मौजूद रहे।



