Saturday, February 7, 2026

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Raipur crime: फरार सूदखोर रोहित-तोमर का पता बताने पर मिलेगा 5 हजार, रायपुर पुलिस ने रखा इनाम

Raipur crime: पहचान गोपनीय रहेगी, 2013 के गोलीकांड में रिव्यू-पिटीशन भी खारिज

Raipur crime: रायपुर, रायपुर में लंबे समय से सूदखोरी, अवैध वसूली, धमकी और मारपीट जैसे अपराधों में सक्रिय नाम रोहित तोमर पर पुलिस ने नकेल और कस दी है। लगातार 5 महीने से फरार हिस्ट्रीशीटर रोहित की गिरफ्तारी के लिए रायपुर पुलिस ने 5,000 रुपए का इनाम घोषित कर दिया है। यह इनाम उस व्यक्ति को दिया जाएगा जो उसे पकड़वाने या उसके छुपे ठिकाने की पुख्ता जानकारी दे। उनकी पहचान भी गोपनीय रखी जाएगी। इससे पहले उसके भाई और अपराधी प्रवृत्ति के वीरेंद्र तोमर पर भी पुलिस इनाम घोषित कर चुकी है। हालांकि वह पुलिस की गिरफ्त में है।

Raipur crime: हाईकोर्ट ने 2013 के दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दी

रोहित तोमर को कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2013 के गोलीकांड मामले में उसकी ओर से दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दी है। इसके बाद इस केस की निचली अदालत में अंतिम सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। पुलिस का मानना है कि कानूनी असफलता और फरारी की वजह से रोहित अब कड़े कदमों की जद में आएगा।

Raipur crime: रोहित का सुराग नहीं

9 नवंबर को पुलिस ने रोहित के साथ फरार चल रहे भाई वीरेंद्र तोमर को ग्वालियर से गिरफ्तार कर रायपुर जेल भेजा था। लेकिन पूछताछ में भी उसने रोहित के ठिकाने के बारे में कुछ नहीं बताया। पुलिस जांच में सामने आया कि रोहित लगातार ठिकाने बदल रहा है और कुछ स्थानीय सहयोगी उसकी मदद कर रहे हैं।

 

Raipur crime: पुलिस की बड़ी तैयारी: पुराने केस फिर खुले, निगरानी बढ़ी

रायपुर पुलिस सभी पुराने मामलों की पुनः जांच शुरू की है। वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर है। मोबाइल लोकेशन और नेटवर्क की साइबर जांच जारी है। सहयोगियों और सपोर्ट नेटवर्क पर सघन निगरानी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तोमर बंधुओं के कारण आम लोगों और छोटे व्यापारियों में सालों से भय का माहौल बना हुआ था।

Raipur crime: करणी सेना कार्यक्रम से पहले कार्रवाई को अहम माना जा रहा

रोहित और वीरेंद्र तोमर का नाम करणी सेना से जुड़े होने के आरोपों में भी आता रहा है। 7 दिसंबर को करणी सेना अध्यक्ष के प्रस्तावित रायपुर प्रदर्शन से पहले पुलिस की यह कार्रवाई बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है पुलिस नहीं चाहती कि अपराधी किसी भी राजनीतिक या सामाजिक समर्थन का फायदा उठाकर बच निकलें।

 

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