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आज-कल में उठाव नहीं हुआ तो 20-25 उपार्जन केन्द्रों में बंद हो सकती है खरीदी

118 उपार्जन केंद्रों में बम्पर लिमिट से अधिक खरीदी

महासमुंद। इस माह से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन उठाव में देरी और अब सुस्ती के चलते स्थिति यह है कि जिले के 182 धान उपार्जन केन्द्रों में से 118 उपार्जन केंद्र ऐसे हैं जहाँ बम्पर लिमिट से अधिक खरीदी हो गई है। इनमें से भी 20-25 ऐसे उपार्जन केन्द्र हैं जहाँ यदि आज-कल में तेजी से उठाव नहीं हुआ तो धान खरीदी बंद हो सकती है।
बता दें कि 14 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो गई है। जिले में समर्थन मूल्य पर धान बेचने 1 लाख 62 हजार 323 किसानों ने पंजीयन कराया है। जिले में 130 समितियों के 182 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी की जा रही है। जिले को इस वर्ष 12 लाख 45 हजार 963 मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य मिला है। मंगलवार तक जिले के 59 हजार 177 किसानों से कुल 298879.84 टन धान की खरीदी की जा चुकी है। नवंबर के आखिरी सप्ताह के बाद जिले में धान कटाई तेजी से शुरू हुई। जिसके साथ ही दिसंबर से धान उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने किसान पहुंच रहे हैं और किसानों से समितियों में लगातार धान खरीदा जा रहा है। 14 नवंबर से 29 नवंबर तक इन 16 दिनों में  जहाँ धान बेचने वाले किसानों की 30839 थी वहीं दिसंबर के शुरूआती 10 दिनों में यह संख्या बढ़कर 59177 हो गई। यानि मात्र 10 दिनों में ही 28338 किसानों ने उपार्जन केन्द्रों में पहुंचकर धान बेचा है और अभी तो 103146 किसानों द्वारा धान बेचा जाना शेष है।
पहले देरी, अब धीमी गति से हो रहा उठाव
जिले में 10 दिसंबर तक कुल 298879.84 टन धान की खरीदी की जा चुकी है। लेकिन मात्र 4319.60 टन ही धान का उठाव हो पाया है और उपार्जन केन्द्रों में 294560.44 टन धान पड़ा है। जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने बताया कि जिले में धान खरीदी लगातार की जा रही है, पर धान के उठाव में देरी और और सुस्त गति के कारण जिले के 182 धान उपार्जन केन्द्रों मे से 118 ऐसे केन्द्र हंै जहाँ बम्पर लिमिट से अधिक धान खरीदी की जा चुकी है । निर्धारित मात्रा में धान उठाव न होने के कारण इन केन्द्रों में धान जाम हो गया है। उक्त 118 केन्द्रों में से 20 से 25 ऐसे केन्द्र हैं जहाँ यदि आज-कल में पर्याप्त धान नहीं उठाया गया तो वहाँ खरीदी बंद हो सकती है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी के दौरान शासन के निर्देशों के तहत किसानों से 17% नमी के मान से धान खरीदी समितियों द्वारा की जाती है। कड़ी धूप एवं लेटलतीफी परिवहन व्यवस्था के चलते धान सूख जाता है। जिसका सीधा असर समितियों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। शासन द्वारा समितियों को धान खरीद पर कोई सूखत मान्य न होने के चलते धान की खरीदी समितियों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती है।
वर्सन
जिले में बम्पर लिमिट में धान की खरीदी अभी तक कहीं नहीं हुई है। कुछ उपार्जन केन्द्रों में जहाँ अधिक जाम की स्थिति बन रही है उन्हें चिन्हांकित कर धान के उठाव में तेजी लाई जा रही है। जिले में प्रतिदिन 150 गाडियां उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव कर संग्रहण केन्द्र में भेजी जा रही है। इधर, राइस मिलरों से पंजीयन और अनुबंध जारी है। अगले हफ्ते से धान उठाव में तेजी आएगी। किसी भी उपार्जन केन्द्र में खरीदी प्रभावित नहीं होगी ।
-टिकेन्द्र राठौर
डीएमओ, महासमुंद।

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