पहले दिन धान बेचने 1233 किसानों ने कटाया टोकन
महासमुंद। जिले के 134 धान खरीदी केन्द्रों में पूजा-अर्चना कर पुरानी पद्धति के आधार पर ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का श्रीगणेश किया गया। आज खरीदी केन्द्रों में अर्ली वेरायटी के धान की आवक अधिक रही। वैसे तो जिले के 182 धान खरीदी केन्द्रों में खरीदी होनी है पर पहले दिन जिले भर के 134 धान खरीदी केन्द्रों में धान बेचने 1233 किसानों ने ही टोकन कटाया है। यानि शेष 48 खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की शुरूआत भी नहीं हुई।
बता दें कि इस साल खरीफ फसल धान खरीदी के लिए जिले के कुल 1 लाख 56 हजार 921 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। इस साल 8921 नये किसानों धान खरीदी के लिए पंजीयन कराया है। गत वर्ष जिलेभर के 1 लाख 48 हजार किसानों का पंजीयन था और 84.40 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी जबकि इस साल 96 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है जो पिछले साल से 11.6 लाख क्विंटल अधिक है। मालूम हो कि धान उत्पादन के मामले में जिला दूसरे नंबर पर है। पिछले साल पूरे प्रदेश में जिला धान खरीदी में पहले नंबर पर था। पिछले साल की तरह इस साल भी आॅनलाइन टोकन किसानों को दिया गया है । आज जिन 14 खरीदी केन्द्रों के 1233 किसानों को टोकन वितरण किया गया है इनसे पहले दिन 46 हजार 610 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। टोकन प्राप्त किसान सुबह धान ले खरीदी केन्द्रों में पहुंच रहे है। धान खरीदी केन्द्रों में सबसे पहले धान खरीदी केन्द्रों में खरीदी के लिए उपयोग किए जाने वाले सामानों की विधि- विधान से समिति प्रबंधकों और किसानों ने पूजा अर्चना कर धान की तौलाई शुरू की। बता दें कि इस साल समर्थन मूल्य पर कामन धान 2203 रुपए प्रति क्विंटल व पतला धान 2203 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है और किसानों से प्रति एकड़ 20 क्विंटल के मान से धान खरीदा जाएगा।
प्लास्टिक बोरियों का नहीं होगा इस्तेमाल
आज से शुरू हुई धान खरीदी के लिए पीडीएस और राईस मिलर्स से करीब 30 लाख पुराने बारदाने मिलने के साथ शासन द्वारा करीब 50 लाख नए बारदाने भेजे गए हैं। समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए इस वर्ष प्लास्टिक बोरियों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय शासन द्वारा लिया गया है। इसकी मुख्य वजह इन बोरियों का जल्दी फट जाना है, जिससे शासन को नुकसान पहुंचता है। इसलिए, हर साल की तरह इस बार भी 60 फीसदी नए बारदाने तथा 40 फीसदी पुराने बारदानों से खरीदी की जाएगी। इसके बावजूद बारदानों का शार्टेज हुआ तो किसानों से लिए गए जूट बारदानों से खरीदी की जाएगी।
जिले में 2.41 लाख हेक्टेयर में धान का उत्पादन
बता दें कि इस साल खरीफ फसल का रकबा 2.60 लाख हेक्टेयर है जिसमें 2.41 लाख हेक्टेयर में धान की फसल ली गयी है जिसमें 40 प्रतिशत अर्ली वेरायटी का धान है जिसकी कटाई और मिंजाई का काम हफ्तेभर पहले से ही शुरू हो गया है। धान के अलावा ज्वार, मक्का, कोदो, रागी, अरहर, मूंग, उड़द, कुत्थी, मूंगफली और तिल की भी फसल ली गयी है। इस बार जिले के 182 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। गत वर्ष यह खरीदी 169 खरीदी केन्द्रों से धान खरीदी की गयी थी। इस साल शासन ने करीब 13 नए उपार्जन केन्द्र प्रस्तावित किए हैं, जिनमें इसी साल से धान खरीदी शुरू हो रही है।
जरूरत 182 की, पर एक भी नहीं पहुंची बायोमैट्रिक मशीन
इस बार बायोमैट्रिक मशीनों के माध्यम में अगूंठा लगाकर धान की खरीदी की जानी थी पर अभी तक जिले के 182 धान खरीदी केन्द्रों में एक भी बायोमैट्रिक मशीन नहीं पहुंची है। नोडल अधिकारी जीएन साहू ने बताया कि बायोमैट्रिक मशीन नहीं मिलने के कारण फिलहाल पुरानी पद्धति यानि मैनुवल तरीके से धान की खरीदी शुरू की गई है।



